
ललितपुर, 14 अगस्त . यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से देश के विभाजन को लेकर दिए गए बयान का ललितपुर विधायक राम रतन कुशवाहा ने समर्थन किया है. उन्होंने विभाजन को भारत के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा. विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने जो कुछ कहा है, वह पूरी तरह सोच-समझकर और सही कहा है.
समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान राम रतन कुशवाहा ने कहा कि विभाजन चाहे किसी भी स्तर पर हो, उसका असर लोगों पर पड़ता है. उन्होंने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बात बिना किसी सोच के नहीं कही गई है. समाज को एकजुट रहना चाहिए और आपसी एकता ही सुरक्षा और मजबूती का आधार है. समाज में एकता बनाए रखना बेहद जरूरी है. एक रहेंगे तो नेक रहेंगे और नेक रहकर एक रहेंगे. विभाजन के आधार पर किसी तरह का विरोध या टकराव नहीं होना चाहिए और ऐसे माहौल में नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है. सरकार का यह दायित्व है कि समाज के सभी वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और किसी भी प्रकार के विभाजन या वैमनस्य को बढ़ावा न मिले.
देश के विभाजन के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए राम रतन कुशवाहा ने कहा कि यह भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय है. भारतवर्ष कभी अखंड था और तत्कालीन राजनीतिक स्वार्थों के कारण देश का विभाजन हुआ. विधायक ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने राजनीतिक और सत्ता संबंधी हितों के चलते समाज में मौजूद मतभेदों को बढ़ाया और अंततः देश का विभाजन हुआ. भारत में हिंदू और मुस्लिम लंबे समय से साथ रहते आए थे और जाति तथा वर्ग के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देना भारतीय समाज की मूल भावना नहीं थी.
उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज के बीच मौजूद अंतर को बढ़ाने की कोशिश की गई और इसका परिणाम देश के विभाजन के रूप में सामने आया. विभाजन की उस त्रासदी को देशवासियों को हमेशा याद रखना चाहिए ताकि इतिहास की गलतियों से सबक लिया जा सके.
मुख्यमंत्री योगी के बयान का समर्थन करते हुए राम रतन कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो बात कही है, वह बिल्कुल सही है. विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास की एक घटना मानकर भूलना नहीं चाहिए, बल्कि इससे समाज को एकता और भाईचारे का महत्व समझना चाहिए. आज भी देश को मजबूत बनाने के लिए सामाजिक एकता जरूरी है. समाज में आपसी विश्वास और भाईचारा कायम रहेगा तो देश भी मजबूत होगा.
जब विधायक से पूछा गया कि इसे देश का विभाजन कहा जाए या इंसानियत का विभाजन, तो राम रतन कुशवाहा ने कहा कि यह दोनों का विभाजन है. उन्होंने कहा कि यदि देश का विभाजन नहीं होता तो इंसानियत का विभाजन भी नहीं होता. विभाजन ने लोगों के बीच ऐसी दूरी पैदा की, जिसका असर केवल राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंसानी रिश्तों और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ा. अगर देश का विभाजन नहीं हुआ होता तो इंसानियत भी एक-दूसरे की दुश्मन नहीं बनती.
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पीएसके