
भुवनेश्वर, 8 जुलाई . केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इंडोनेशिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक का उल्लेख किए जाने को राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए जिस प्रकार बीजू पटनायक के ऐतिहासिक योगदान को याद किया, उससे न केवल भारत का गौरव बढ़ा, बल्कि ओडिशा की वैश्विक पहचान भी और मजबूत हुई. इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार ने आईआईएम बेंगलुरु को इंडोनेशिया में अपना पहला विदेशी कैंपस स्थापित करने की अनुमति प्रदान की है. प्रधान ने इसे भारतीय शिक्षा व्यवस्था के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान वहां की संसद को संबोधित करते हुए स्वर्गीय बीजू पटनायक के योगदान का जिक्र किया. बीजू पटनायक ने इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इसी कारण वहां की जनता के मन में उनके प्रति विशेष सम्मान और स्नेह है. प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक संबंध को याद कर भारत और ओडिशा दोनों का गौरव बढ़ाया है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ओडिशा के लोगों की ओर से वह पीएम मोदी का आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य की गौरवशाली विरासत को सम्मान दिया. साथ ही, उन्होंने इंडोनेशिया सरकार का भी धन्यवाद किया, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया. प्रधान ने कहा कि यह सम्मान भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों तथा दोनों देशों की गहरी ऐतिहासिक मित्रता का उत्कृष्ट उदाहरण है.
शिक्षा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय शिक्षा प्रणाली अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही है. शिक्षा मंत्रालय की ओर से आईआईएम बेंगलुरु को इंडोनेशिया में अपना विदेशी परिसर स्थापित करने की मंजूरी दी गई है. यह केवल एक संस्थान का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा मॉडल की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है.
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों का अंतरराष्ट्रीय विस्तार लगातार बढ़ रहा है. आईआईएम का परिसर दुबई में स्थापित हो चुका है, आईआईटी अबू धाबी में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और अफ्रीकी देशों में भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के विस्तार की दिशा में काम हो रहा है. ये सभी पहल इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को दुनिया भर में स्वीकार्यता मिल रही है.
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पीएसके/डीकेपी