
नई दिल्ली, 5 जुलाई . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा पर सोमवार (6 जुलाई) को रवाना होंगे. यह प्रधानमंत्री की चौथी और मई 2018 में भारत-इंडोनेशिया संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी.
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी आधिकारिक यात्रा करेंगे. विदेश मंत्रालय के मुताबिक जकार्ता में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और दोनों देशों के बीच साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे. वह भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे.
यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रांबानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे, जो भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों का प्रमुख प्रतीक माना जाता है.
दोनों देशों के बीच रिश्ते दशकों पुराने हैं. इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि बने थे. दुनिया में हिंदू देवता की सबसे ऊंची प्रतिमा भी इंडोनेशिया में स्थित है. वहीं, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक ने इंडोनेशिया के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. जिसके लिए पटनायक को मानद रूप से इंडोनेशिया की नागरिकता दी गई और उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान ‘भूमि पुत्र’ से भी नवाजा गया था.
इंडोनेशिया के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे. यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है. मेलबर्न में, प्रधानमंत्री मोदी, प्रधानमंत्री अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. वह ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे. प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों को संबोधित करेंगे. साथ ही, भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल होंगे.
ऑस्ट्रेलिया के बाद प्रधानमंत्री मोदी 10 से 11 जुलाई तक न्यूजीलैंड के ऑकलैंड की आधिकारिक यात्रा करेंगे. करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा होगी. ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. दोनों नेता व्यापार, वाणिज्य, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करेंगे, जिनमें पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है.
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केआर/