कर्नाटक में भाजपा नेता की हत्या मामले को लेकर गरमाई राजनीति, धारवाड़ सीट को खाली घोषित करने की मांग

धारवाड़, 27 अप्रैल . कर्नाटक में भाजपा नेता की हत्या मामले में व्हिसल ब्लोअर ने सोमवार को धारवाड़ में निकाली गई उस मौन रैली की कड़ी निंदा की, जिसे पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी के समर्थकों ने आयोजित किया था. विनय कुलकर्णी को हाल ही में इस मामले में विशेष अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

धारवाड़ में भाजपा नेता और जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा हत्या मामले के व्हिसलब्लोअर बसवराज कोरावर ने आरोप लगाया है कि दोषी ठहराए गए नेता विनय कुलकर्णी के समर्थक इस मामले को साजिश बताकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.

सोमवार को धारवाड़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर पर भी सवाल उठाए और पूछा कि अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बावजूद कुलकर्णी को अभी तक विधायक पद से अयोग्य क्यों नहीं ठहराया गया है.

उन्होंने मांग की कि अदालत के फैसले के बाद तुरंत धारवाड़ विधानसभा सीट को खाली घोषित किया जाए.

कोरावर ने कहा कि विरोध को अदालत के फैसले के खिलाफ नहीं, बल्कि कथित साजिश के खिलाफ बताया जा रहा है और उन्होंने इस दावे पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा, ‘वे कहते हैं कि यह अदालत के खिलाफ नहीं बल्कि उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने साजिश की. आखिर यह साजिश है क्या?’

कोरावर ने आरोप लगाया कि विनय कुलकर्णी खुद भी मामले को प्रभावित करने की कोशिशों में शामिल थे. उन्होंने दावा किया कि योगेश गौड़ा के भाई गुरुनाथ गौड़ा के साथ समझौते की कोशिशें हुईं और योगेश गौड़ा की पत्नी को प्रलोभन दिए गए.

उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सभी ऑडियो और वीडियो सबूत अदालत में पेश किए जाएंगे.

यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में इस मामले में हुए घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है.

विनय कुलकर्णी इस मामले में आरोपी नंबर 15 हैं. यह केस राज्य सरकार ने सीबीआई को सौंपा था. जब आरोप लगे थे, तब वे मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री के पद पर थे.

योगेश गौड़ा की 15 जून 2016 को धारवाड़ शहर के एक जिम में कुछ हमलावरों ने हत्या कर दी थी. वे राजनीतिक रूप से विनय कुलकर्णी के विरोधी थे.

कुलकर्णी को 2020 में गिरफ्तार किया गया था और 2021 में जमानत मिली थी. बाद में गवाहों को प्रभावित करने के आरोप में सीबीआई ने उनकी जमानत रद्द करने की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.

इसके बाद कुलकर्णी ने आत्मसमर्पण किया और हाल ही में उन्हें फिर से जमानत मिली है.

एएमटी/वीसी