
इस्लामाबाद, 15 जुलाई . पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मंगलवार को स्थानीय प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई बड़ी झड़पों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है.
रिपोर्टों के मुताबिक रावलाकोट में बढ़ते सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें कई आम लोगों की मौत हो गई.
इस पर इस्लामाबाद में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जमकर आलोचना हो रही है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने पिछले महीने से पीओके में चल रहे हालात को ‘बेहद चिंताजनक’ बताया और दोनों की भूमिका पर सवाल उठाए.
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के मुताबिक, मंगलवार को हुई अलग-अलग झड़पों में कम से कम दो सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हुई. पाकिस्तानी मीडिया ने यह भी बताया कि इलाके में 4,000 से ज्यादा रेंजर्स तैनात किए गए हैं और वहां मीडिया पर भी रोक लगा दी गई है.
लगातार छठे हफ्ते में पहुंच चुके इस आंदोलन के बीच मंगलवार को रावलाकोट में हजारों लोग इकट्ठा हुए. इस दौरान जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अम्मान खान ने पाकिस्तान पर इस इलाके पर ‘जबरन कब्जा’ करने का आरोप लगाया और इस क्षेत्र को लेकर इस्लामाबाद की लंबे समय से चली आ रही बात को खारिज कर दिया.
उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए लोगों से कहा कि पीओके को ‘विवादित क्षेत्र’ नहीं, बल्कि ‘कब्जे वाला क्षेत्र’ कहा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “यह जबरन कब्जा किया गया इलाका है.”
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक जीत नहीं मिल जाती. उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर प्रदर्शनकारियों को अपनी जान भी देनी पड़े, तब भी यह लड़ाई नहीं रुकेगी.
इस विशाल रैली में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जोरदार नारे लगे. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन जीत मिलने तक चलता रहेगा.
इसी बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने बुधवार को पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा आम लोगों की कथित हत्या की कड़ी निंदा की.
यूकेपीएनपी ने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि वह शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा और जानलेवा बल का इस्तेमाल तुरंत बंद करे, गैरकानूनी हत्याएं, मनमानी गिरफ्तारियां, धमकियां और लोगों को जबरन गायब करना रोके.
पार्टी ने कहा कि लोगों तक बिना किसी रुकावट के खाना, दवाइयां, इलाज और मानवीय सहायता पहुंचने दी जाए. संचार सेवाओं पर लगी पाबंदियां हटाई जाएं और लोगों को आने-जाने की पूरी आजादी दी जाए.
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एवाई/एबीएम