
चंडीगढ़, 5 नवंबर . विधानसभा चुनावों से पहले, पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने गुरुवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा महंगाई भत्ते (डीए) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी नाकाफी है और 13 नवंबर से एक महीने तक चलने वाले आंदोलन की घोषणा की.
यह फैसला कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों की संयुक्त समन्वय समिति ने लिया है, जो लगभग चार लाख सरकारी कर्मचारियों और 3.5 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करती है.
यह आंदोलन 13 से 19 नवंबर तक संगरूर शहर में अनिश्चितकालीन धरने के साथ शुरू होगा. यूनियनों ने अपने विरोध प्रदर्शन की जगह चंडीगढ़ से बदलकर संगरूर करने का भी फैसला किया है.
विरोध प्रदर्शन के तहत, कर्मचारी और पेंशनभोगी 1 से 5 दिसंबर तक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी (आप) के सभी 91 विधायकों के आवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे. वे सत्ताधारी पार्टी के पुतले भी जलाएंगे.
6 दिसंबर को, प्रदर्शनकारी पुतलों की ‘राख’ को लुधियाना के बुड्ढा नाला में विसर्जित करने की योजना बना रहे हैं. महीने भर चलने वाला यह आंदोलन 13 दिसंबर को शंभू से अमृतसर तक बनने वाली मानव श्रृंखला के साथ संपन्न होगा.
यूनियन नेताओं सुखचैन खेरा और गुरनाम सिंह विर्क ने कहा कि डीए (महंगाई भत्ता) को लेकर हाल ही में की गई घोषणा, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मुख्य मांगों को पूरा करने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती और सभी लंबित मुद्दों का समाधान नहीं करती.
यूनियनें पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करने, बाकी बचे 10 प्रतिशत डीए को जारी करने, डीए के बकाया भुगतान, छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, और पुराने वेतनमानों व भत्तों को बहाल करने की मांग कर रही हैं.
उन्होंने सरकार की उन नीतियों और फैसलों को वापस लेने की भी मांग की है, जो उनके अनुसार कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर बुरा असर डालते हैं.
मुख्यमंत्री मान ने बुधवार को डीए में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की थी, जिसे उन्होंने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए दिवाली का तोहफा बताया.
इस बढ़ोतरी के साथ, डीए की दर 53 प्रतिशत हो गई है. इससे लगभग चार लाख कर्मचारियों और 3.5 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होने की उम्मीद है. सरकार ने कहा है कि यह बढ़ोतरी नवंबर के वेतन और पेंशन में दिखेगी, जिसका भुगतान दिसंबर में किया जाएगा.
हालांकि, यूनियनों का तर्क है कि केवल डीए की दर बढ़ाने से बकाया राशि और अन्य लंबित मांगों का मुद्दा हल नहीं होता है. यूनियन प्रतिनिधियों ने बकाया डीए किस्तों और कर्मचारियों को दिए गए वित्तीय लाभों के संबंध में सरकार के दावों को भी चुनौती दी है.
यह नया टकराव ऐसे समय में हुआ है, जब सरकार का दावा है कि उसने पिछले दो महीनों में डीए में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिसमें पहले घोषित की गई आठ प्रतिशत की वृद्धि भी शामिल है.
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एससीएच