
नई दिल्ली, 30 जुलाई . कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ कथित कोयला घोटाले से जुड़े मामले को Supreme Court द्वारा खारिज किए जाने का स्वागत करते हुए इसे सत्य की जीत बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मनमोहन सिंह और उनकी सरकार के खिलाफ झूठा प्रचार किया था, जो अब पूरी तरह बेनकाब हो गया है. इसके साथ ही उन्होंने भारतीय हॉकी टीम की विश्व कप के लिए पारंपरिक नीली जर्सी की जगह केसरिया जर्सी अपनाने के फैसले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी.
राजीव शुक्ला ने से बातचीत में कहा कि Supreme Court द्वारा मनमोहन सिंह के खिलाफ मामला खारिज किया जाना बेहद अच्छी बात है, लेकिन अफसोस इस बात का है कि आज वह इस फैसले को देखने के लिए जीवित नहीं हैं. यदि मनमोहन सिंह आज होते तो उन्हें इस फैसले से निश्चित रूप से संतोष और खुशी मिलती, क्योंकि वह एक बेहद ईमानदार व्यक्ति थे.
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वर्ष 2014 के चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिए मनमोहन सिंह की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. तत्कालीन यूपीए सरकार पर 2जी स्पेक्ट्रम और कोयला आवंटन जैसे मामलों में गंभीर आरोप लगाए गए, लेकिन वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालतों ने इन आरोपों में कोई दम नहीं पाया. सीबीआई ने भी मनमोहन सिंह को किसी प्रकार के भ्रष्टाचार से मुक्त बताया है. अब इस फैसले का व्यक्तिगत लाभ मनमोहन सिंह को नहीं मिल सकता, लेकिन उनके परिवार और समर्थकों को यह संतोष अवश्य मिलेगा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार साबित हुए.
राजीव शुक्ला ने कहा कि भाजपा द्वारा खड़ा किया गया झूठ का पुलिंदा अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ईमानदार थी, जबकि मौजूदा सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा करने से बचती है.
भारतीय हॉकी टीम द्वारा आगामी विश्व कप में पारंपरिक नीली किट की जगह केसरिया जर्सी पहनने के फैसले पर राजीव शुक्ला ने कहा कि जर्सी के रंग का फैसला हॉकी फेडरेशन का विषय है और उसी को इस पर निर्णय लेना चाहिए. भगवा रंग किसी एक राजनीतिक दल की पहचान नहीं है, बल्कि वह भारत के राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों में से एक है और हजारों वर्षों से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है. हालांकि, भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वह विभिन्न राष्ट्रीय और ऐतिहासिक प्रतीकों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती है. सरदार वल्लभभाई पटेल, तिरंगा और ‘वंदे मातरम’ जैसे प्रतीकों को भी भाजपा अपने राजनीतिक एजेंडे से जोड़ने का प्रयास कर रही है. ‘वंदे मातरम’ का कांग्रेस के स्वतंत्रता आंदोलन और उसके अधिवेशनों से ऐतिहासिक संबंध रहा है और इसे कांग्रेस के नेताओं ने राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान अपनाया था.
राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि मंदिरों के चढ़ावे और दान की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. धार्मिक संस्थानों से जुड़े आर्थिक मामलों में पारदर्शिता होनी चाहिए और साधु-संतों की भूमिका सुनिश्चित की जानी चाहिए. इस मुद्दे को लेकर संसद में भी चर्चा और हंगामे की संभावना है.
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पीएसके