ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर राहुल गांधी के आरोप गलत और भ्रामक: आरकेएस भदौरिया

नई दिल्ली, 30 अप्रैल . लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा ग्रेट निकोबार परियोजना का विरोध किए जाने पर सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने पलटवार करते उनके बयान को गलत और भ्रामक बताया है.

नई दिल्ली में सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि जब विकास परियोजना शुरू होती तो पर्यावरणीय चिंताओं और आदिवासी हितों को पूरा ध्यान रखा जाता है. उन्होंने कहा कि यह परियोजना देश के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

आरकेएस भदौरिया ने कहा कि राहुल गांधी ने यह मुद्दा उठाया है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है.

उन्होंने कहा कि मैंने भी यह खबर देखी थी जिसमें दावा किया गया कि यह आदिवासी समुदाय के हितों के खिलाफ है, पेड़ काटे जा रहे हैं, यह घोटाला है और सबसे बड़ी चोरी है. मुझे लगता है कि यह पूरी तरह गलत और भ्रामक है.

भदौरिया ने इस परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रोजेक्ट नीति आयोग द्वारा वर्ष 2021 में शुरू किया गया एक एकीकृत विकास योजना है. इसका कुल परिव्यय लगभग 72,000 करोड़ रुपए है.

उन्होंने कहा कि इसके तहत एक अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का निर्माण किया जाएगा, जिसकी क्षमता 16.2 मिलियन टीईयू होगी. यह बंदरगाह न केवल नागरिक शिपिंग के लिए, बल्कि भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा.

इसके अलावा, एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बनेगा, जिसमें नागरिक उपयोग के साथ-साथ सैन्य उपयोग के लिए एक डिफेंस एन्क्लेव भी शामिल होगा. साथ ही, 450 मेगावाट क्षमता का गैस और सौर ऊर्जा आधारित पावर प्लांट तथा एक आधुनिक टाउनशिप का विकास भी किया जाएगा. यह पूरी तरह से एकीकृत विकास परियोजना है.

उन्होंने रणनीतिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि रणनीतिक दृष्टि से यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. दुनिया का 25-30 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है. चीन की ऊर्जा निर्भरता का लगभग 75 प्रतिशत व्यापार भी इसी मार्ग से होता है.

इस क्षेत्र में समुद्री और हवाई क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ बहु-क्षेत्रीय क्षमता निर्माण के लिए यह परियोजना बेहद जरूरी है. यह एक अजेय ठिकाना बनेगा.

उन्होंने आर्थिक पहलू का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक रूप से भी यह परियोजना देश के लिए फायदेमंद साबित होगी. इससे कोलंबो और सिंगापुर जैसे बंदरगाहों पर हमारी निर्भरता कम होगी और क्षेत्र का समग्र विकास होगा.

आदिवासी हितों के सवाल पर भदौरिया ने कहा कि जनजातीय हितों का मतलब उन्हें पुरानी स्थिति में बनाए रखना नहीं है. विकास और जनजातीय संस्कृति व हितों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है. इस स्मार्ट सिटी में वर्तमान में लगभग 8,000 लोग रहते हैं, जबकि शहर की क्षमता 6 से 6.5 लाख लोगों की होगी.

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यह कोई नया मुद्दा नहीं है. पिछले 20 वर्षों से रक्षा सेवाएं लगातार इस क्षेत्र के विकास की मांग कर रही थीं. पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी भी इस विकास के पक्ष में थे. पिछली सरकार ने भी सैद्धांतिक रूप से इसका समर्थन किया था. अब इस सरकार ने इसे एकीकृत रूप से लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं.

उन्होंने पर्यावरण और आदिवासी चिंताओं पर कहा कि जब भी कोई विकास परियोजना शुरू की जाती है तो पर्यावरणीय चिंताओं और आदिवासी हितों को पूरा ध्यान दिया जाता है. सभी वैधानिक मंजूरियां ली जाती हैं और संबंधित समितियां गठित की जाती हैं. आदिवासी निकायों और जनजातीय मामलों के मंत्रालय को भी इसमें शामिल किया जाता है. आदिवासियों के हित सरकार के लिए सर्वोपरि हैं.

डीकेएम/डीकेपी