राहुल का दांव उल्टा पड़ा, पीएम मोदी के पिता पर टिप्पणी से देशभर में आक्रोश : राम कदम

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर . महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के विधायक राम कदम ने राहुल गांधी और विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कपट और षड्यंत्र के तहत दांव चला था, जो अब उन्हीं पर उल्टा पड़ गया है. पीएम मोदी के पिता को राजनीति का मुद्दा बनाने से पूरा देश क्रोधित है और जनता की एक ही गूंज है कि मोदी कहीं नहीं जाएगा.

भाजपा नेता और विधायक राम कदम ने कहा, “देश के विपक्ष ने और राहुल गांधी ने मन में कपट रखते हुए षड्यंत्र के तहत एक दांव फेंका था, अब यह दांव उन्हीं पर उलटा पड़ गया. उन्होंने पीएम मोदी के पिता को अपनी राजनीति का मुद्दा बनाया लेकिन समूचा देश अब क्रोधित हो गया है और देश की जनता की अब एक ही गूंज बनी है कि मोदी कहीं नहीं जाएगा. राहुल गांधी का दांव उन्हीं पर उल्टा पड़ गया.”

उन्होंने कहा कि संविधान किसी एक राजनीतिक दल की निजी जागीर नहीं है. देश के गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए हम तैयार हैं. एक सबूत लेकर आइए, एक ठोस उदाहरण या प्रमाण लेकर आइए. हिम्मत नहीं है इनमें; सबूत नहीं है तो कहां से देंगे?

भाजपा विधायक ने कहा कि अब देश की जनता भी चिढ़ चुकी है कि राहुल गांधी और विपक्ष के नेता उनको इतना मूर्ख समझते हैं कि ये लोग कुछ भी बोलेंगे और देश मान लेगा. ऐसा नहीं होता. भ्रम बहुत लंबे समय तक नहीं चलता. अब देश की जनता की गूंज बन चुकी है कि मोदी कहीं नहीं जाएगा.

उन्होंने कहा कि 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे हैं. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर जगह सड़कों का निर्माण हुआ. विश्व के 35 से अधिक देशों ने पीएम मोदी को अपने देश का सर्वोच्च पुरस्कार दिया. ये प्रधानमंत्री मोदी का नहीं, देश के 146 करोड़ देशवासियों का सम्मान है. 11वीं से हम चौथी अर्थव्यवस्था बने. बहुत जल्द तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं. यही राहुल गांधी की समस्या है.

1 नवंबर को इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर भाजपा विधायक ने कहा कि राहुल गांधी रैली करें या महाभियोग की राजनीतिक नौटंकी करें, लोकतंत्र में उन्हें सब करने का अधिकार है लेकिन संविधान की धज्जियां उड़ाने का अधिकार उनको नहीं है. एक हाथ में संविधान की किताब लेते हो, उसकी दुहाई देते हो, उसी संविधान में अनुच्छेद 124(5) में क्या लिखा है, पढ़िए. महाभियोग एक प्रक्रिया है, गंभीर प्रक्रिया है. उसको आप सड़कों का तमाशा बनाओगे? रैली निकालिए, पर एक उदाहरण तो दीजिए. उदाहरण आपके पास कुछ नहीं है. झूठ के ऊपर झूठ, झूठ के ऊपर झूठ. राहुल गांधी, आप याद रखें, झूठ के पथ पर चलते समय हर मोड़ पर पुनः एक बार झूठ का सहारा लेना होता है.

उन्होंने कहा कि अब राहुल गांधी ने जो दांव रखा था, वह दांव उन्हीं पर उलटा पड़ गया. देश के लोगों को पता चला कि एक त्यागपूर्ण, समर्पित जीवन जीने वाले पीएम मोदी के खिलाफ सारा विपक्ष खड़ा है. एक व्यक्ति के खिलाफ पूरा विपक्ष खड़ा है. जनता क्रोधित थी और जनता ने कहना शुरू कर दिया कि मोदी कहीं नहीं जाएगा.

एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्ने अगर पलटें तो इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि उस समय की कांग्रेस, उस समय के कांग्रेस के नेता सरदार वल्लभभाई पटेल के पक्ष में थे. फिर किस समय और किसके कारण वह पक्ष पलटा गया और किसे नेतृत्व मिला, यह सारे देश ने देखा. अगर सरदार वल्लभभाई पटेल और उनके कर्तत्व का, उनके साहस का, उनके राजनीतिक जीवन का, लोगों के लिए समर्पण का यदि किसी ने गौरव किया होगा तो मुझे अभिमान है कि भारतीय जनता पार्टी ने उसका गौरव किया. आज कांग्रेस के किस कार्यक्रम में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा होती है, दिखाइए. जिन्होंने पूरे भारत को एक सूत्र में जोड़ने का काम किया, कांग्रेस के नेताओं को सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम लेने में शर्म आती है. क्यों शर्म आती है?

भाजपा नेता रामकदम ने कहा कि अगर सरदार वल्लभभाई पटेल नहीं होते तो आज भी यह देश बिखरा हुआ होता. इस बिखरे हुए देश को एक माला में पिरोने का काम सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया है. जो जीवन इस देश के लिए समर्पित होता है, वह केवल भारतीय जनता पार्टी के लिए नहीं, समूचे देश के लिए वंदनीय है. सवाल उठता है कि कांग्रेस के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल वंदनीय क्यों नहीं हैं? क्या राहुल गांधी इसका कोई जवाब देंगे.

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केके/पीएम