रंगभेद को लेकर राजीव खंडेलवाल ने पेश की राय, कहा- इंसान की असली पहचान उसकी सूरत नहीं, बल्कि सीरत होती है

मुंबई, 6 जुलाई . टेलीविजन और फिल्मों की दुनिया में अपनी दमदार अदाकारी से अलग पहचान बना चुके अभिनेता राजीव खंडेलवाल सिर्फ अपने अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए भी जाने जाते हैं. उन्होंने बॉडी शेमिंग जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी थी और अब रंगभेद और उससे पैदा होने वाली हीन भावना को लेकर अपनी राय दी है. उन्होंने कहा है कि किसी इंसान की पहचान उसके रंग से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व, सोच और कर्मों से होनी चाहिए.

इन दिनों वह रियलिटी शो ‘तुम हो ना- घर की सुपरस्टार’ को होस्ट कर रहे हैं. शो के दौरान कंटेस्टेंट डॉक्टर रीमा ने अपने जीवन का एक भावुक अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया, ”बचपन से ही मुझे अपने सांवले रंग को लेकर लोगों की बातें सुननी पड़ीं. अक्सर मेरी तुलना मेरी गोरी बहनों से की जाती थी. बार-बार सुनाई देने वाली ऐसे शब्दों ने धीरे-धीरे मेरे आत्मविश्वास पर असर डाला, जिससे लंबे समय तक मन में हीन भावना बनी रही.”

डॉक्टर रीमा की यह कहानी सुनने के बाद राजीव खंडेलवाल ने कहा, ”यह बेहद दुखद है कि आज भी समाज में किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके रंग-रूप के आधार पर किया जाता है. किसी के रंग को लेकर सवाल उठाना या टिप्पणी करना बिल्कुल गलत सोच है.”

राजीव ने कहा, ”यह बहुत बुनियादी बात है कि कोई किसी के रंग-रूप पर इस तरह सवाल कैसे उठा सकता है. समाज को अब ऐसी मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है, क्योंकि किसी इंसान का रंग उसकी क्षमता, मेहनत या व्यक्तित्व तय नहीं करता.”

उन्होंने आगे कहा, ”अगर लोग सच में समाज की सोच बदलना चाहते हैं, तो उन्हें अपने कर्मों से उदाहरण पेश करना होगा. लोगों को ऐसा काम करना चाहिए कि भविष्य में माता-पिता अपने बच्चों की तुलना उनके रंग से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और उपलब्धियों से करें.”

राजीव ने कहा, ”आप ऐसा करके दिखाइए कि लोग कहें कि हमारे बच्चे बिल्कुल डॉक्टर रीमा जैसे हों. हमें भी वैसा ही रंग चाहिए. यह बदलाव सिर्फ हमारे कर्म ही ला सकते हैं.”

बातचीत के दौरान राजीव ने खूबसूरती को लेकर अपनी निजी सोच भी साझा की. उन्होंने कहा, ”मेरे लिए सुंदरता का रंग से कोई संबंध नहीं है. मैंने हमेशा सांवले रंग को बेहद आकर्षक और खूबसूरत माना है. मैं यह बात केवल डॉक्टर रीमा का हौसला बढ़ाने के लिए नहीं कह रहा हूं, बल्कि मेरी सोच हमेशा से ऐसी रही है.”

राजीव ने इस दौरान लोगों से यह भी अपील की कि समाज की नकारात्मक टिप्पणियों को कभी अपने आत्मविश्वास पर हावी नहीं होने देना चाहिए. इंसान की असली पहचान उसकी सूरत नहीं, बल्कि उसकी सीरत होती है. अगर व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और अच्छे संस्कार हैं, तो वही उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है.

उन्होंने कहा, “जैसा कहा जाता है, सूरत पर मत जाइए, सीरत पर जाइए. यह बात समझदार लोग कहते हैं और मेरा भी मानना है कि किसी के भीतर कभी भी अपने रंग या रूप को लेकर हीन भावना नहीं आनी चाहिए.”

पीके/एएस