
नई दिल्ली, 27 जुलाई . अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों से जुड़े मामले में Supreme Court ने जांच को और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) में फोरेंसिक विशेषज्ञ और ऑडिट से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल करने का निर्देश देते हुए दो सप्ताह के भीतर जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.
सुनवाई के बाद याचिकाकर्ताओं और उनके वकीलों ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अदालत ने निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सांसद सुधाकर सिंह समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अजय राय, वरुण सिन्हा और सत्यम सिंह राजपूत ने बताया कि उनकी याचिका में राम मंदिर डोनेशन फंड के इस्तेमाल और कथित वित्तीय गड़बड़ियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है.
याचिकाकर्ताओं के वकील वरुण सिन्हा ने बताया, “वह नरेंद्र कुमार गोस्वामी से जुड़े मामले में हस्तक्षेपकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से Supreme Court में पेश हुए. सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित नई एसआईटी के सदस्यों की सूची अदालत के समक्ष पेश की. इस टीम में इंस्पेक्टर जनरल (आईजी), डीआईजी, एसएसपी और एडिशनल एसएसपी स्तर के अधिकारी शामिल किए गए हैं. अदालत ने इस सूची पर विचार किया और जांच को और मजबूत बनाने के लिए विशेषज्ञों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया.”
वकील सत्यम सिंह राजपूत ने कहा, “Supreme Court ने एसआईटी की संरचना में बदलाव करते हुए एक फोरेंसिक विशेषज्ञ को शामिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से कई अन्य मांगें भी अदालत के समक्ष रखी गई थीं, जिन पर आगे की सुनवाई में विचार किया जा सकता है.”
याचिकाकर्ता अजय कुमार राय ने कहा, “सुनवाई भले ही संक्षिप्त रही, लेकिन इसमें महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया. उत्तर प्रदेश सरकार ने Supreme Court को सूचित किया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की नई एसआईटी गठित कर दी गई है और उसने जांच की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जांच टीम में फोरेंसिक ऑडिट और ऑडिट अकाउंट्स के क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, ताकि वित्तीय रिकॉर्ड और दान से जुड़े लेनदेन की वैज्ञानिक और पेशेवर तरीके से जांच हो सके.”
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