रसेल अर्नोल्ड ने पडिक्कल की बल्लेबाजी को सराहा, मानव सुथार की रंगना हेराथ से की तुलना

नई दिल्ली, 20 अगस्त . श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर रसेल अर्नोल्ड ने गाले टेस्ट मैच में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले देवदत्त पडिक्कल की जमकर तारीफ की है. उन्होंने मानव सुथार के धैर्य को भी सराहा है.

साई सुदर्शन के सीरीज से बाहर होने के बाद पहले टेस्ट में नंबर तीन पर उतरे पडिक्कल का प्रदर्शन बल्ले से शानदार रहा. उन्होंने 167 रनों की लाजवाब पारी खेली, जिससे भारतीय टीम श्रीलंका पर शिकंजा कस सकी. कर्नाटक के इस बल्लेबाज ने दूसरी पारी में भी 44 रनों की अहम पारी खेली.

सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के वर्चुअल इवेंट में अर्नोल्ड ने ‘ ’ से कहा, “पडिक्कल बहुत अच्छी लय में दिख रहे हैं. उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है. वह अपनी खूबियों का बहुत अच्छे से इस्तेमाल करते हैं – जैसे उनकी पहुंच और पैरों का इस्तेमाल – धीमी पिचों और हालात में खेलना असल में एक कला है. यह आसान लग सकता है, लेकिन हर कोई रन नहीं बना पाता.”

उन्होंने आगे कहा, “जैसा कि आपने पूरे टेस्ट मैच के दौरान देखा होगा, बाकी सभी खिलाड़ियों को संघर्ष करना पड़ा. ज्यादातर खिलाड़ियों को मुश्किल हुई, और जिस तरह से वह आत्मविश्वास से भरे हैं और सभी फॉर्मेट में अच्छा खेल रहे हैं, मुझे लगता है कि पडिक्कल को यह मौका सही समय पर मिला है ताकि उनकी फॉर्म का भी फायदा मिल सके. उन्होंने बहुत क्लास और क्वालिटी दिखाई है, और मुझे लगता है कि भारत उनसे काफी उम्मीदें रख सकता है.”

अगर पडिक्कल ने बल्ले से भारत की जीत की नींव रखी, तो गेंदबाजी में मानव सुथार ने अपनी घूमती गेंदों से कमाल किया. मानव ने पहली पारी में 4 और दूसरी इनिंग में 6 विकेट लेते हुए श्रीलंका के बल्लेबाजी क्रम को घुटने टेकने पर मजबूर किया.अर्नोल्ड ने सुथार के संयमित धैर्य की तुलना श्रीलंका के महान स्पिनर रंगना हेराथ से की.

उन्होंने कहा, “दूसरी ओर, सुथार बहुत सरल हैं, उन्हें देखना बहुत अच्छा लगता है, और मुझे लगता है कि यही उनकी ताकत है – सरल और धैर्यवान होना. श्रीलंकाई पिचों पर हम अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि आपको स्वाभाविक वेरिएशन मिलते हैं. बेशक, कुछ स्पिनरों में बहुत कौशल होता है. उदाहरण के लिए, मुरलीधरन या वॉर्न. हालांकि, जिन अन्य लोगों ने वास्तव में अच्छा प्रदर्शन किया है, उन्होंने इसे सरल रखा है और धैर्य बनाए रखा है. इसका सबसे अच्छा उदाहरण रंगना हेराथ हैं, और सुथार भी ठीक वैसा ही करते दिखे.”

श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर ने आगे कहा, “मैदान पर उतरना, बस अपनी गति और गेंद छोड़ने के तरीके में बदलाव करना. यह सब कुछ वैसा ही था. तो उन दोनों से यही अच्छी बात देखने को मिली. सुथार के सब्र ने ही उन्हें आगे बढ़ाया, और ऐसा सब्र बनाए रखना मुश्किल होता है.”

रविचंद्रन अश्विन के रिटायर होने और जडेजा के करियर के आखिरी दौर में होने के साथ-साथ, चेतेश्वर पुजारा के जाने के बाद भारत लंबे समय के लिए नंबर तीन के बल्लेबाज की तलाश कर रहा है. ऐसे में पडिक्कल और सुथार का उभरना टेस्ट टीम के लिए अच्छी खबर है.

एसएम/डीकेपी