
मॉस्को, 8 सितंबर . क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा कि रूस भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के नतीजों की सराहना करता है और उसे पूरा विश्वास है कि इस सप्ताह नई दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सफल रहेगा.
स्पुतनिक इंडिया द्वारा आयोजित एक वर्चुअल ब्रीफिंग में पेस्कोव ने कहा कि ब्रिक्स उन देशों का समूह है, जो दुनिया को आगे बढ़ाने और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को लेकर समान सोच रखते हैं. उन्होंने कहा कि रूस ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है.
पेस्कोव ने कहा, “मैं कहूंगा कि यह शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा. हम इस अवधि के दौरान भारत की अध्यक्षता के परिणामों की बहुत सराहना करते हैं और हमें कोई संदेह नहीं है कि यह शिखर सम्मेलन सफल होगा. रूस ब्रिक्स के सभी कार्यकारी प्रारूपों में बहुत सक्रिय भूमिका निभाता रहा है.”
उन्होंने कहा, “आप जानते हैं कि हम इस यात्रा की शुरुआत से ही जुड़े रहे हैं. करीब 20 साल पहले इसकी शुरुआत आरआईसी (रूस-भारत-चीन) के रूप में हुई थी. इसके बाद ब्राजील के जुड़ने से यह ब्रिक बना, फिर दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद ब्रिक्स बना और अब यह एक बड़ा समूह बन चुका है.”
पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स कोई औपचारिक संगठन नहीं है.
उन्होंने कहा, “मैं याद दिलाना चाहता हूं कि हमारे पास कोई चार्टर नहीं है, कोई औपचारिक नियमावली नहीं है और न ही कोई स्थायी कार्यालय है. यह उन देशों का समूह है जो दुनिया के विकास और सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं.”
उन्होंने कहा कि रूस ब्रिक्स सहयोग के तीन प्रमुख स्तंभों, नीति एवं सुरक्षा, अर्थव्यवस्था एवं वित्त, तथा सांस्कृतिक और मानवीय संपर्कों को मजबूत करने के लिए अपनी ओर से पूरा योगदान दे रहा है. उन्होंने कहा कि रूस समूह के भीतर अपनी कई पहलों को भी आगे बढ़ा रहा है.
पेस्कोव ने ब्रिक्स के विभिन्न सहयोग प्रारूपों में नए देशों को शामिल करने के विचार का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि 2024 में शुरू की गई “पार्टनर स्टेट्स” श्रेणी का विकास अच्छी तरह हो रहा है.
उन्होंने बताया कि बेलारूस, बोलिविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को यह दर्जा दिया गया है. इन देशों के प्रतिनिधि धीरे-धीरे ब्रिक्स की विभिन्न कार्यप्रणालियों में शामिल हो रहे हैं और रूस इसे एक सकारात्मक कदम मानता है.
दिमित्री पेस्कोव ने उन दावों से असहमति जताई कि ब्रिक्स पश्चिमी देशों के खिलाफ है.
उन्होंने कहा, “हम भारत की इस बात से सहमत हैं कि ब्रिक्स किसी पश्चिमी देश के खिलाफ नहीं है. ब्रिक्स अपने सदस्य देशों के लिए है और उन देशों के लिए है जो इसकी विचारधारा को साझा करते हैं. यह किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है. यही ब्रिक्स की सबसे अनूठी विशेषता है.”
पेस्कोव ने कहा कि जो लोग ब्रिक्स को किसी अन्य समूह का विरोधी बताते हैं, वे बड़ी गलती कर रहे हैं.
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है. इस सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों, साझेदार देशों और आमंत्रित देशों के नेता भाग लेंगे.
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” रखा गया है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “ह्यूमैनिटी फर्स्ट” की भावना पर आधारित जन-केंद्रित सोच को दर्शाता है.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन के दौरान नेता ब्रिक्स के भीतर सहयोग को और मजबूत करने, साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा करने तथा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे.
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकों और उच्चस्तरीय कार्यक्रमों का आयोजन किया है. इनका उद्देश्य राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय साझेदारी तथा सांस्कृतिक और जन-से-जन संपर्कों के तीन प्रमुख क्षेत्रों में ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाना है.
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एएमटी/डीएससी