
मुंबई, 18 जून . शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें निराधार बताया. उन्होंने सांसदों की सुरक्षा बढ़ाने के मुद्दे पर सरकार का बचाव किया और कहा कि सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय पूरी तरह गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि किसी राजनीतिक दल के.
राजू वाघमारे ने कहा कि राजनीति में हर बात किसी की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होती और जब ऐसा नहीं होता तो कुछ लोगों को वह धोखा प्रतीत होता है. उन्होंने संजय राउत और यूबीटी के कुछ प्रवक्ताओं की बयानबाजी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी भाषा और आरोपों का स्तर बेहद निम्न है. जिस प्रकार की बयानबाजी और गाली-गलौज की राजनीति की जा रही है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हम उनकी भावनाओं को समझते हैं कि वे परेशान और दुखी हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह के बयान दिए जा रहे हैं, उससे लगता है कि उन्हें गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है.
सांसदों की सुरक्षा बढ़ाने को लेकर संजय राउत द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी स्पष्ट कर चुकी है कि न तो एकनाथ शिंदे ने और न ही शिवसेना ने किसी प्रकार का कथित ऑपरेशन टाइगर चलाया है. जब ऐसा कोई अभियान ही नहीं चलाया गया, तो यह कहना कि किसी विशेष राजनीतिक उद्देश्य से सांसदों को सुरक्षा दी जा रही है, पूरी तरह गलत है.
उन्होंने आगे कहा कि सांसदों को सुरक्षा देना या न देना गृह मंत्रालय का विषय है. सुरक्षा एजेंसियां खतरे के आकलन के आधार पर निर्णय लेती हैं. यदि किसी जनप्रतिनिधि को सुरक्षा की आवश्यकता महसूस होती है, तो सरकार उसे सुरक्षा उपलब्ध कराती है. यह फैसला किसी राजनीतिक दल का नहीं होता. संजय राउत को भी सरकार की ओर से सुरक्षा प्रदान की गई है. सुरक्षा किसी व्यक्ति के राजनीतिक विचारों के आधार पर नहीं बल्कि उसकी सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए तय की जाती है.
उन्होंने कहा कि संजय राउत जिस तरह की बातें करते हैं, उससे कई लोगों की भावनाएं आहत होती हैं. सरकार ने उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की है. इसलिए यह कहना कि किसी विशेष दल ने सुरक्षा उपलब्ध कराई है, पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है.
भाजपा और शिवसेना पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर वाघमारे ने कहा कि संजय राउत को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने राजनीतिक इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए. उन्होंने कहा कि शिवसेना और भाजपा ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था और बहुमत भी प्राप्त किया था, लेकिन बाद में महाविकास आघाड़ी का गठन कर राजनीतिक समीकरण बदले गए. उन्होंने सवाल किया कि भाजपा की पीठ में खंजर किसने भोंका और महाविकास आघाड़ी की स्थापना किसने की, यह जनता अच्छी तरह जानती है. राजनीति में जिस स्तर की शुरुआत की बात आज की जा रही है, उसकी शुरुआत किसने की, इसका जवाब भी जनता के पास है.
सांसदों को कथित तौर पर धन देकर अपने पक्ष में करने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे आरोपों का कोई आधार नहीं है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति कुछ भी कह सकता है, लेकिन आरोपों को साबित करने के लिए ठोस सबूत और प्रमाण होने चाहिए. कभी दस करोड़, कभी सौ करोड़ और कभी हजार करोड़ रुपये देकर सांसद खरीदने जैसी बातें कही जाती हैं, लेकिन इन आरोपों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया जाता. बिना प्रमाण के इस प्रकार के आरोप लगाना केवल मीडिया और जनता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास है.
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पीएसके