चार्जशीट में यासीन मलिक का नाम आने पर सरला भट्ट के परिवार को इंसाफ की उम्मीद

जम्मू, 29 जून . साल 1990 में हुए कश्मीरी हिंदू नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख यासीन मलिक का नाम चार्जशीट में आने के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने की उम्मीद जताई. सरला भट्ट के चचेरे भाई पीके भट्ट ने कहा कि अब उन्हें उम्मीद है कि वर्षों से लंबित इस मामले में आखिरकार इंसाफ मिलेगा. हालांकि, पीके भट्ट ने यासीन मलिक के लिए कड़ी सजा की मांग करते हुए कहा कि उसे उसके अपराधों के लिए कठोरतम दंड मिलना चाहिए. यासीन मलिक के लिए केवल जेल की सजा पर्याप्त नहीं है.

पीके भट्ट ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि सरला भट्ट की निर्मम हत्या के आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. कम से कम उसकी आंखें निकाल ली जाएं, उसके पैर काट दिए जाएं और उसे खुले में किसी कुत्ते की तरह छोड़ दिया जाए. उसे जेल में भी नहीं रखना चाहिए, क्योंकि वहां तो उसे अच्छा ट्रीटमेंट मिल रहा है. वह ऐसी ही सजा का हकदार है.

सरला भट्ट हत्याकांड को लेकर पीके भट्ट ने कहा कि ‘जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड’. अगर इंसाफ देना ही था इनको तो वैसे उस वक्त की गवर्नमेंट ही ऐसी थी कि जो इंसाफ नहीं दे पाती थी. आप देखिए, यही यासीन मलिक ने एयर फोर्स के जवानों को मारा, गवर्नमेंट ऑफिसर्स को मारा. नीलकंठ गंजू है, सरला भट्ट है, गिरजा टिक्कू है, सतीश टिक्कू है. सतीश टिक्कू को तो बिट्टा कराटे ने मारा. वह खुद कह रहा है कि मैंने इनको मारा. ऑन कैमरा बिट्टा कराटे ने कहा था कि मैंने मारा सतीश टिक्कू को. उसके साथ क्या हुआ? कौन सा इंसाफ हुआ उसके साथ? अब थोड़ी सी उम्मीद जगी है, शायद इंसाफ हो सके.

पीके भट्ट ने अपनी चचेरी बहन सरला भट्ट की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि उनका अपहरण किया गया, फिर उनके साथ दुष्कर्म किया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई. रेप और हत्या के बाद, जब उनके अंतिम संस्कार का समय आया और हम उनकी अस्थियां लेने गए, तो हमें उन्हें उठाने नहीं दिया गया. जूतों से अस्थियों का अपमान किया गया. फिर भी हम किसी तरह मुट्ठी भर अस्थियां इकट्ठा कर पाए और उधर से निकल गए. इसके बाद हमारे घर में ब्लास्ट किया गया. ब्लास्ट सुबह 5:00 बजे मेन गेट पर हुआ. यह ब्लास्ट इंडिकेशन था कि आप क्यों नहीं जा रहे हो? सारा बिल्कुल कंक्रीट का था, दीवार थी, कंक्रीट था. सारा कुछ गिर गया तो उसी दिन फिर निकल गए. उसके आधे-पौने घंटे के बाद आर्मी को बुलाया तो आर्मी आ गई. उनके साथ चली गई उधर, एक-डेढ़ किलोमीटर तक, जहां तक बस मिली. तो निकल गए. बाकी अच्छी बात है. अगर चार्जशीट दाखिल हो गई है तो अब उम्मीद है कि इंसाफ मिलेगा.

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