अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षा सख्त, एलजी मनोज सिन्हा ने की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक

जम्मू, 29 अप्रैल . जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को अमरनाथ यात्रा से पहले एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. पवित्र अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी.

एलजी मनोज सिन्हा ने जम्मू के लोक भवन में बैठक की अध्यक्षता की. इसका उद्देश्य मौजूदा सुरक्षा स्थिति का आकलन करना और आगामी यात्रा के लिए तैयारियों की समीक्षा करना था.

इस बैठक में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात सहित वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया. बैठक का मुख्य फोकस कानून-व्यवस्था के प्रबंधन और समन्वित सुरक्षा व्यवस्थाओं पर था.

बैठक में जम्मू-कश्मीर के समग्र सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा की गई. इसमें वार्षिक यात्रा के सुरक्षित और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया. यह एक प्रमुख तीर्थयात्रा है, जो हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है.

अधिकारियों ने बताया कि चर्चा का केंद्र निवारक उपायों को मजबूत करना और संवेदनशील क्षेत्रों में उच्च स्तर की सतर्कता बनाए रखना भी था.

माना जा रहा है कि उपराज्यपाल ने सुरक्षा एजेंसियों के बीच निर्बाध समन्वय और किसी भी उभरती स्थिति से निपटने के लिए समय पर प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया.

बैठक में प्रशासन के ‘नशामुक्त समाज’ बनाने के अभियान के तहत चल रहे प्रयासों की भी समीक्षा की गई. इसमें नशीले पदार्थों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जागरूकता पहलों पर विशेष ध्यान दिया गया.

अधिकारियों ने इस क्षेत्र में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में, नशामुक्त अभियानों और प्रवर्तन प्रयासों को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की.

इस वार्षिक तीर्थयात्रा में श्रद्धालु दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हिमालयी गुफा मंदिर, अमरनाथ की यात्रा करते हैं.

इस गुफा मंदिर में बर्फ से बनी एक संरचना (हिम शिवलिंग) है, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों का प्रतीक मानते हैं. गुफा मंदिर तक पहुंचने के दो रास्ते हैं, एक पारंपरिक और लंबा रास्ता पहलगाम से होकर जाता है, और दूसरा छोटा रास्ता बालटाल से होकर जाता है.

पहलगाम मार्ग का उपयोग करने वाले श्रद्धालुओं को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग का उपयोग करने वाले श्रद्धालु ‘दर्शन’ करने के बाद उसी दिन बेस कैंप लौट आते हैं. दोनों मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध हैं.

यह 52-दिवसीय लंबी यात्रा इस वर्ष 28 अगस्त को समाप्त होगी. अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन 14 अप्रैल को शुरू हो चुका है. हर दिन यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 10,000 तक सीमित है, इसमें हेलीकॉप्टर से यात्रा करने वाले लोग शामिल नहीं हैं.

यात्रा की आधिकारिक शुरुआत ‘प्रथम पूजन’ से होती है. यह एक ऐसा अनुष्ठान है, जिसमें भगवान शिव से यात्रा के सुचारू और सुरक्षित होने के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है.

श्रावण पूर्णिमा का त्योहार, जो रक्षा बंधन के साथ ही पड़ता है, इस यात्रा का सबसे अहम समय होता है. इस दौरान पवित्र गुफा में भारी भीड़ उमड़ती है.

एएसएच/एबीएम