
नई दिल्ली, 13 सितंबर . नई दिल्ली में सशस्त्र बलों के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इसके तहत समकालीन सुरक्षा चुनौतियों पर मंथन किया जाएगा. इसमें सैन्य अधिकारियों के साथ रक्षा, विदेश व गृह मंत्रालय के अधिकारियों की भी मौजूदगी रहेगी. इन चर्चाओं से सशस्त्र बलों के अधिकारियों को उभरती सुरक्षा चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी. साथ ही, भविष्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते समय संतुलित और सही फैसले लेने में भी सहायता मिलेगी.
नई दिल्ली में होने वाले इस मंथन के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी. इनमें क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियां शामिल हैं. युद्ध में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलाव पर भी चर्चा होगी. इसके अलावा, रणनीतिक संचार और जटिल सुरक्षा मुद्दों से निपटने में नागरिक-सैन्य समझ को मजबूत करने की जरूरत पर भी विचार किया जाएगा. मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ की ओर से समकालीन सुरक्षा चुनौतियों पर यह एक पांच दिवसीय आयोजन है. दरअसल यहां संयुक्त संचालन समीक्षा एवं मूल्यांकन’ यानी ‘कोर’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. यह कार्यक्रम 14 से 18 सितंबर तक मानेकशॉ सेंटर में होगा.
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस कार्यक्रम में रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे. रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे. ‘कोर’ कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ अधिकारियों को देश और क्षेत्र से जुड़े मौजूदा सुरक्षा मुद्दों की बेहतर समझ देना है. इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ और जाने-माने वक्ता अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे. यह कार्यक्रम मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ की पेशेवर क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और साझा सोच को बढ़ावा देना भी है. कार्यक्रम के जरिए वरिष्ठ नेतृत्व को राष्ट्रीय सुरक्षा की बदलती चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा.
बता दें कि हाल ही में मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के तत्वावधान में बदलती युद्ध चुनौतियों पर एक पाठ्यक्रम तैयार किया गया था. युद्ध चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने की रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से यह त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम आयोजित किया गया. यह चौथा युद्ध पाठ्यक्रम था. चार सप्ताह का यह पाठ्यक्रम 30 अगस्त को पूरा हुआ. इसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी संगठनों, शिक्षाविदों, रक्षा उद्योग, वैज्ञानिकों और रणनीतिक विचार संस्थानों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.
भविष्य का युद्ध कैसा होगा? इसी पर यहां गहन मंथन हुआ. पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने उन तकनीकों और रणनीतियों पर चर्चा की, जो आने वाले समय में युद्ध की तस्वीर बदल सकती हैं. इनमें भू-राजनीतिक बदलाव, एआई, क्वांटम तकनीक, साइबर युद्ध, संज्ञानात्मक युद्ध, सूचना युद्ध, स्वायत्त प्रणालियां, अंतरिक्ष आधारित अभियान और तकनीक आधारित युद्ध प्रमुख रहे.
इसके अलावा जमीन, समुद्र, हवा और अंतरिक्ष आदि सभी क्षेत्रों में एक साथ सैन्य अभियान चलाने की क्षमता यानी बहु-क्षेत्रीय अभियान पर मंथन किया गया. ग्रे-जोन गतिविधियों और भविष्य के सैन्य अभियानों की बदलती प्रकृति पर भी विचार-विमर्श हुआ था.
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जीसीबी/डीकेपी