
लखनऊ, 25 सितंबर . समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार को लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में निधन हो गया. वह 74 वर्ष के थे. उनके निधन की खबर से उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी जी का निधन अत्यंत दुःखद है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल दें. भावपूर्ण श्रद्धांजलि.”
वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस नेता ललन कुमार ने भी रामगोविंद चौधरी के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि उनका जाना प्रदेश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है. उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों व समर्थकों को यह दुःख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की.
बलिया की धरती से निकले रामगोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति के मजबूत समाजवादी नेताओं में गिने जाते थे. उन्होंने हमेशा जमीन से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीति का आधार बनाया. अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन में उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जैसे दिग्गज नेताओं के साथ काम किया. बाद में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ उनका लंबा राजनीतिक और वैचारिक सफर रहा.
पार्टी संगठन को मजबूत करने और समाजवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है.
रामगोविंद चौधरी अपने राजनीतिक जीवन में आठ बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए विधायक चुने गए. समाजवादी पार्टी की सरकार में उन्होंने मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाली. वर्ष 2017 से 2022 तक वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे.
सदन के भीतर उन्होंने विपक्ष की आवाज को मजबूती से उठाया और सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों पर घेरा. उनकी बेबाक शैली और संसदीय अनुभव के कारण उन्हें प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता माना जाता था.
रामगोविंद चौधरी के निधन पर समाजवादी पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है.
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डीएससी