
मुंबई, 4 जुलाई . मुंबई क्राइम ब्रांच की साइबर पुलिस ने ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग और फर्जी आईपीओ में निवेश का झांसा देकर 1.07 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया.
इस मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें चार आरोपी गुजरात के वडोदरा से और दो आरोपी मुंबई से पकड़े गए.
मुंबई पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था. आरोपी पहले व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों से संपर्क करता था और फिर उन्हें फर्जी शेयर ट्रेडिंग एवं निवेश योजनाओं का लालच देता था. इसके लिए नकली ट्रेडिंग एप्लिकेशन और कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था.
जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम करता था. सबसे पहले ऐसे लोगों की तलाश की जाती थी, जो बैंक खाते उपलब्ध करा सकें. इसके बाद कंपनियों के नाम पर करंट अकाउंट खोले जाते थे और ठगी से मिली रकम को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाकर आगे ट्रांसफर कर दिया जाता था. पुलिस इस पूरे मामले को एक संगठित साइबर फ्रॉड रैकेट के तौर पर जांच रही है.
इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब मुंबई की 43 वर्षीय एक निवेशक को व्हाट्सऐप पर शेयर ट्रेडिंग का एक विज्ञापन दिखाई दिया. लिंक पर क्लिक करते ही उन्हें ‘अर्जुन मेहता, कुआ सिक्योरिटीज, यूके’ नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया गया. इस ग्रुप में खुद को शेयर बाजार का विशेषज्ञ बताने वाले लोग लगातार बाजार के रुझानों और भारी मुनाफे के दावे साझा कर निवेशकों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे थे.
मुंबई पुलिस के मुताबिक, कुछ समय बाद पीड़िता को एक कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराया गया और एक एप्लिकेशन डाउनलोड करवाई गई. इस ऐप का इंटरफेस बिल्कुल असली शेयर बाजार जैसा दिखाई देता था, जिससे पीड़िता को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ. इसके बाद उसने अपने और अपने परिवार के बैंक खातों से अलग-अलग चरणों में कई खातों में रकम ट्रांसफर कर दी.
जांच में पता चला कि इस तरह पीड़िता से कुल 1,07,37,208 रुपए की ठगी की गई. फिलहाल मुंबई पुलिस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है.
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वीकेयू/एएस