‘सतलुज’ विवाद पर शशि रंजन का दावा, ‘फिल्म बैन से मिलेगा पायरेसी को बढ़ावा’

मुंबई, 9 जुलाई . दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस बीच अब अभिनेता, निर्माता, निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता शशि रंजन मामले में खुलकर सामने आए हैं. उन्होंने को दिए इंटरव्यू में फिल्म का समर्थन किया.

से बात करते हुए शशि रंजन ने कहा, ”फिल्म का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं था, जिसे आपत्तिजनक कहा जाए. आज के दौर में किसी फिल्म को बैन करना समाधान नहीं है. जब किसी फिल्म पर रोक लगाई जाती है तो लोगों की जिज्ञासा और बढ़ जाती है. लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर उस फिल्म में ऐसा क्या है, जिसे देखने से रोका जा रहा है?”

शशि रंजन ने कहा, “सतलुज एक अच्छी फिल्म है और इसमें काम करने वाले सभी कलाकारों ने शानदार अभिनय किया है. फिल्म को उसके कंटेंट और कलाकारों के काम के आधार पर देखा जाना चाहिए. अगर किसी बात पर आपत्ति है तो उस पर बातचीत हो सकती है, लेकिन पूरी फिल्म को रोक देना सही तरीका नहीं माना जा सकता.”

उन्होंने पायरेसी को लेकर भी चिंता जताई. शशि रंजन ने कहा, ”जब किसी फिल्म को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाता है तो लोग उसे दूसरे रास्तों से देखने की कोशिश करते हैं. इससे पायरेसी को बढ़ावा मिलेगा और फिल्म उद्योग को नुकसान होगा. बेहतर होता कि फिल्म को एक सही मंच पर उपलब्ध रहने दिया जाता, ताकि दर्शक कानूनी तरीके से उसे देख पाते.”

दरअसल, दिलजीत दोसांझ की यह फिल्म 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई थी. फिल्म पहले ‘पंजाब 95’ नाम से बनाई गई थी, जिसे बाद में बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया गया. रिलीज के कुछ समय बाद फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया. इसके बाद से यह मामला लगातार चर्चा में है. जी5 ने अपने बयान में कहा था कि अगले आदेश तक फिल्म भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी और उसे दोबारा उपलब्ध कराने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है.

फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है, जिनका किरदार दिलजीत दोसांझ ने निभाया. फिल्म के हटने के बाद दिलजीत दोसांझ ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और यह फिल्म अब रुकने वाली नहीं है.

इस पूरे विवाद ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है. फिल्म को हटाए जाने के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. यह याचिका मोहाली के जीरकपुर निवासी सरवन सिंह ने दाखिल की है. उन्होंने खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की विरासत का समर्थक और जी5 का सब्सक्राइबर बताया है. याचिका में मांग की गई है कि फिल्म को भारत में दोबारा जी5 पर उपलब्ध कराया जाए.

याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म को बिना किसी सार्वजनिक आदेश, अदालत के निर्देश या स्पष्ट सरकारी आदेश के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. इस मामले में केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी), पंजाब सरकार और जी एंटरटेनमेंट को प्रतिवादी बनाया गया है.

पीके/एबीएम