
इस्लामाबाद, 20 अगस्त . पाकिस्तान की Supreme Court ने सरकार को गुरुवार को जोर का झटका दिया. जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सुनाए फैसले के विरोध में सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने लौटा दिया.
मामला इमरान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित करने का था. कोर्ट ने अपने 18 अगस्त के आदेश में सरकार को इसकी व्यवस्था करने को कहा था.
प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन ने बताया कि Supreme Court के रजिस्ट्रार कार्यालय ने अधूरे दस्तावेज और पेपर बुक होने का हवाला देते हुए याचिका वापस की. हालांकि, एक सूत्र के मुताबिक सरकार आवश्यक संशोधनों के साथ याचिका दोबारा दाखिल कर सकती है. इसके साथ ही रजिस्ट्रार की आपत्तियों के खिलाफ अपील भी की जा सकती है.
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई के महासचिव सलमान अकम रजा ने दावा किया कि अदालत की आपत्तियों के बाद सरकार ने अपनी पुनर्विचार याचिका वापस ले ली है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा, ” Supreme Court के 18 अगस्त के आदेश का पालन न करने का कोई बहाना नहीं है और इमरान खान को तत्काल शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित किया जाना चाहिए.”
Supreme Court ने मंगलवार को सरकार को निर्देश दिया था कि इमरान खान को दो दिनों के भीतर इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए, जहां बहु-विषयक चिकित्सा बोर्ड उनकी जांच और उपचार करे.
तीन सदस्यीय पीठ ने यह अंतरिम आदेश जारी किया था. अदालत के समक्ष दायर याचिकाओं में इमरान को अस्पताल में भर्ती कराने, उनके निजी चिकित्सकों और परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने की अनुमति देने तथा उनके चिकित्सा रिकॉर्ड परिवार को उपलब्ध कराने की मांग की गई थी.
अदालत ने इमरान के निजी चिकित्सक और उनकी बहन को उनके इलाज से जुड़े रहने की अनुमति भी दी थी. साथ ही अधिकारियों को परिवार के साथ नियमित संपर्क सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था.
हालांकि, सरकार ने बुधवार को Supreme Court का रुख करते हुए इस आदेश की समीक्षा और इसे वापस लेने की मांग की थी. सरकार ने तर्क दिया था कि आदेश जेल नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है तथा इमरान खान के मामले में भेदभावपूर्ण है.
याचिका में कहा गया कि यदि अदालत ने इस कानूनी प्रावधान पर गौर किया होता तो पूर्व प्रधानमंत्री को अदियाला जेल से इस्लामाबाद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश पारित नहीं किया जाता.
यह याचिका इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी के एडवोकेट जनरल नावेद हयात मलिक ने मुख्य आयुक्त की ओर से दायर की थी.
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केआर/