
जम्मू, 28 जुलाई . जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एसपी वैद ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) की मौजूदा स्थिति, दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल, बिहार में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा एके-47 से फायरिंग किए जाने समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. पीओजेके में हालात को गंभीर बताते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाए. वहीं, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया.
पीओजेके की स्थिति पर एसपी वैद ने कहा कि वहां होने वाले चुनाव वास्तविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है. वहां वही राजनीतिक दल जीतता है जिसे पाकिस्तानी सेना का समर्थन प्राप्त होता है. बड़ी संख्या में लोग विरोध-प्रदर्शन में शामिल हैं और ऐसे में मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. पाकिस्तान रेंजर्स और सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की गई है, जिसमें कई लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं. यह दुखद है कि पीओजेके में निर्दोष लोगों के खिलाफ बर्बर कार्रवाई हो रही है.
एसपी वैद ने कहा कि पीओजेके से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं, जिनमें स्थानीय लोग अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से मदद की गुहार लगा रहे हैं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और पश्चिमी मीडिया की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कहीं और ऐसी घटनाएं होतीं तो व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिलती. भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पीओजेके के हालात को मजबूती से उठाना चाहिए और वहां की स्थिति से दुनिया को अवगत कराना चाहिए.
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल पर एसपी वैद ने कहा कि जब बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए, पथराव हुआ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, तब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग की आवश्यकता पड़ती है. यदि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को नहीं रोका होता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी. किसी भी पुलिसकर्मी की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने साथियों और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा करना होती है. हालांकि, छात्रों के मामलों में बल का प्रयोग न्यूनतम होना चाहिए.
बिहार में प्रदर्शन के दौरान एके-47 से फायरिंग करने के मामले पर एसपी वैद ने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए एके-47 जैसी असॉल्ट राइफल का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता. ऐसी परिस्थितियों में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार वाटर कैनन, आंसू गैस, चिली ग्रेनेड और आवश्यकता पड़ने पर लाठीचार्ज जैसे उपाय अपनाए जाने चाहिए. घटना को लेकर विभिन्न तरह की बातें सामने आ रही हैं और बिहार पुलिस ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित भी किया है. इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी तथ्य सामने आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए.
पेपर लीक रोकने के लिए प्रस्तावित सख्त कानून पर एसपी वैद ने कहा कि यदि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई के लिए कानून ला रही है तो उसका समर्थन किया जाना चाहिए. यदि कानून में कड़ी सजा और भारी आर्थिक दंड जैसे प्रावधान शामिल हैं तो इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है. उन्होंने विपक्ष से भी इस विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर रचनात्मक सुझाव देने की अपील की और कहा कि शिक्षा सुधार पर संसद के भीतर और बाहर गंभीर चर्चा होनी चाहिए.
पूर्व डीजीपी ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की आवश्यकता है. शिक्षा का अत्यधिक व्यावसायीकरण चिंता का विषय है और सरकार को शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय बढ़ाना चाहिए ताकि विश्वस्तरीय उच्च शिक्षण संस्थान विकसित किए जा सकें. बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय युवाओं को देश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराने होंगे. साथ ही, उन्होंने नैतिक शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को शिक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की वकालत करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अच्छे नागरिक बनने, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का महत्व सिखाना समय की आवश्यकता है.
एसपी वैद ने आगे कहा कि केवल कठोर कानून ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही को भी समान रूप से मजबूत करना होगा, तभी पेपर लीक जैसी समस्याओं पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जा सकेगा.
–
पीएसके