मीरा रोड चाकूबाजी पर सपा विधायक अबू आजमी बोले- ‘अगर सच है तो सजा बहुत सख्त होनी चाहिए’

मुंबई, 28 अप्रैल . समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने नशा-विरोधी अभियान में सक्रिय भाग लिया. इस दौरान उन्होंने मीरा रोड चाकूबाजी मामले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और महाराष्ट्र में बढ़ते नशीले पदार्थों के खतरे पर चिंता जताई.

सपा नेता अबू आजमी ने चाकूबाजी की घटना पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मैं इसे स्वीकार नहीं करता. मुझे इस पर यकीन नहीं है. अगर यह सच है, तो सजा बहुत सख्त होनी चाहिए. कोई मुस्लिम जाकर किसी हिंदू पर हमला करे और यह दिखाने की कोशिश करे कि जो कश्मीर में हुआ, वही यहां भी होना चाहिए, मेरा मानना है कि यह बिल्कुल गलत होगा.”

उन्होंने आगे कहा, “अगर इसकी जांच की जाए, ठीक वैसे ही जैसे टीसीएस मामले में निदा खान नाम की महिला के साथ हो रहा है. हर धर्म में अच्छे और बुरे लोग होते हैं. अगर कोई मुस्लिम ऐसा कर रहा है, तो मेरा मानना है कि वह बिल्कुल भी मुस्लिम नहीं है.”

नशे की समस्या पर अबू आजमी ने कहा, “सदन के अंदर हर सत्र में मैं नशीले पदार्थों के बारे में बात करता हूं. मैं अकेला नहीं हूं; ज्यादातर विधायक इस मुद्दे पर शिकायत कर रहे हैं. नशीले पदार्थों का चलन तेजी से बढ़ रहा है, खासकर झुग्गी-बस्ती वाले इलाकों में. अभी चार दिन पहले ही 35 साल के एक युवक की हत्या छह लोगों ने तलवार से कर दी; वे नशे में थे. यह सब महाराष्ट्र में हो रहा है.”

विधायक अबू आजमी ने अपने इलाके में नशा-विरोधी जागरूकता अभियान चलाने की बात कही. उन्होंने कहा, “कम से कम मेरे इलाके में लोगों के बीच नशीले पदार्थों को लेकर जागरूकता पैदा करने की जरूरत है. इस पर सख्त कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए.”

उन्होंने कुछ रसूखदार लोगों द्वारा पार्टियों में नशे को फैशन बनाने और बेरोजगार युवाओं द्वारा नशे का सेवन करने की भी निंदा की. अबू आज़मी बोले, “कुछ लोग पार्टियों में नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, तो कुछ बेकार घूमते रहते हैं. माता-पिता परेशान हैं. नशीले पदार्थों को किसी भी तरह खत्म किया जाना चाहिए.”

मराठी भाषा के मुद्दे पर भी अबू आजमी ने कहा, “मैं पूछता हूं कि जब महाराष्ट्र का कोई व्यक्ति हाई कोर्ट जाता है और मराठी में अपना आवेदन जमा करता है, तो उससे कहा जाता है कि इसे अंग्रेजी में करवाओ. जज और वकील अंग्रेजी में बहस करते हैं, कोई कुछ नहीं समझता. आप इसे पूरी तरह खत्म ही क्यों नहीं कर देते?”

एससीएच /पीएम