लेडी श्रीराम कॉलेज में ऑफलाइन क्लास बंद करना गलत फैसला : संदीप दीक्षित

नई दिल्ली, 23 सितंबर . दिल्ली में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना के बाद लेडी श्रीराम कॉलेज की ओर से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नियमित ऑफलाइन कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में किए जाने पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं लगातार सामने आना गंभीर चिंता का विषय है और कॉलेज को ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर ऑनलाइन करने की स्थिति बनना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.

संदीप दीक्षित ने से कहा कि दिल्ली में हुई रेप की घटना बेहद चिंताजनक है. पिछले कुछ समय से महिलाओं के खिलाफ गंभीर और घिनौने अपराध लगातार हो रहे हैं. केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को इस स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. लेडी श्रीराम कॉलेज जैसे संस्थान को सुरक्षा कारणों से ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर ऑनलाइन करना पड़ा, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां पढ़ने वाली छात्राओं, विशेषकर हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के बीच कितना भय होगा. दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर यह गंभीर प्रश्न है.

उन्होंने कहा कि अगर किसी कॉलेज जैसे संस्थान में आने-जाने वाले लोगों को न्यूनतम सुरक्षा का एहसास भी नहीं कराया जा सकता तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था की उपयोगिता पर सवाल उठता है. उन्होंने इस मामले को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली पुलिस के लिए गंभीर सवाल बताया. महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर दिल्ली के समाज की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इतने गंभीर अपराधों के बावजूद समाज में उस स्तर का आंदोलन या विरोध दिखाई नहीं दे रहा है, जैसा पहले देखने को मिलता था.

दीक्षित ने कहा कि ऐसे मुद्दों को राजनीति से ऊपर उठकर समाज, महिलाओं और अपराध के विषय के तौर पर देखा जाना चाहिए. यदि सरकार पर इस तरह के मामलों का असर नहीं हो रहा है तो नागरिकों और जनता को अपनी आवाज उठाकर सरकार तक बात पहुंचानी होगी.

एसआईआर को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच असहमति के दावों पर जारी घमासान के बारे में संदीप दीक्षित ने कहा कि सामने आई खबरें बेहद गंभीर हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रकाशित रिपोर्ट में तथ्यों के आधार पर इन बातों की पुष्टि हुई है. दीक्षित ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि रिपोर्ट सही है तो इससे चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर बड़े सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं और फॉर्म में बदलाव किए गए और संसद के अधिकारों को भी नजरअंदाज किया गया.

उन्होंने आगे कहा कि यदि रिपोर्ट में सामने आई बातें सही साबित होती हैं तो यह बहुत गंभीर संवैधानिक प्रश्न है. उन्होंने सांसदों से इस मामले में कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कदम उठाएं. इसके साथ ही उन्होंने आगे आपराधिक मामला चलाए जाने की भी मांग की.

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पीएसके