
लखनऊ, 5 जून . विश्व पर्यावरण दिवस पर लखनऊ में आयोजित ‘बायोयुग’ कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि जिस तरह स्वदेशी हथियारों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को सफल बनाया, उसी तरह बायोफ्यूल, बायोमैटेरियल और बायो-इकोनॉमी भारत को ऊर्जा और आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगे.
उन्होंने कहा कि गन्ने और कृषि आधारित संसाधनों से तैयार होने वाले बायोफ्यूल और बायोप्लास्टिक न केवल पर्यावरण की रक्षा करेंगे, बल्कि देश की आर्थिक मजबूती और रणनीतिक सुरक्षा के भी नए स्तंभ बनेंगे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लखनऊ में ‘बायोयुग’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा, ईंधन, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता हासिल करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि बायोफ्यूल, बायोमैटेरियल और बायो-इकोनॉमी भविष्य के भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के प्रमुख आधार बनने जा रहे हैं.
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारतीय सेनाओं ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचों को सटीक निशाना बनाकर ध्वस्त किया. उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे भारतीय सेनाओं का ऊंचा मनोबल और स्वदेशी रक्षा क्षमता प्रमुख कारण रही. उन्होंने कहा, “हम यह इसलिए कर पाए क्योंकि हमारे पास स्वदेशी हथियार थे और हम किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं थे. यही सामर्थ्य हमें ऊर्जा, ईंधन और तकनीक के क्षेत्र में भी अर्जित करनी होगी.”
राजनाथ सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल स्वच्छता तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राष्ट्रीय शक्ति और सुरक्षा से भी है. उन्होंने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सैनिकों के मनोबल को भी बढ़ाता है तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. रक्षा मंत्री ने कहा कि जब देश अपने खेतों, फसलों और जैविक संसाधनों से ऊर्जा पैदा करता है, तब वह बाहरी दबावों के प्रति अधिक मजबूत बनता है. उन्होंने कहा कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और स्वदेशी संसाधनों पर आधारित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता है.
उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण कर रहा है, जो मुख्य रूप से गन्ने और कृषि उत्पादों से तैयार होता है. पश्चिम एशिया में संकट और वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल के दौरान यही एथेनॉल मिश्रण भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हुआ.
उन्होंने कहा, “यह 20 प्रतिशत एथेनॉल हमारे लिए एक बफर की तरह था, जिसने अर्थव्यवस्था को बड़े झटके से बचाया. बायोफ्यूल केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का भी एक महत्वपूर्ण हथियार है.”
राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश में बायोप्लास्टिक उद्योग की संभावनाओं की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की बायोप्लास्टिक इंडस्ट्री नीति इस क्षेत्र को नई गति दे रही है. उन्होंने विशेष रूप से गन्ने से तैयार होने वाले पीएलए (पॉली-लैक्टिक एसिड) आधारित बायोप्लास्टिक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरी तरह जैव-अवक्रमणीय (बायोडिग्रेडेबल) है और पर्यावरण के लिए अनुकूल विकल्प साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि पारंपरिक प्लास्टिक आज एक “आवश्यक बुराई” बन चुका है, लेकिन बायोप्लास्टिक के माध्यम से इस बुराई को प्रकृति के अनुकूल बनाया जा सकता है. बलरामपुर चीनी मिल्स द्वारा गन्ने से पीएलए उत्पादन की पहल को उन्होंने सराहनीय कदम बताया.
रक्षा मंत्री ने कहा कि मध्य-पूर्व में हाल के संकटों के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई, जिससे कई प्लास्टिक उद्योगों को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ा, लेकिन यदि भारत गन्ने और कृषि आधारित संसाधनों से बायोप्लास्टिक का उत्पादन बढ़ाता है तो विदेशी निर्भरता कम होगी और देश की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बायो-इकोनॉमी को बढ़ावा मिला है. गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार हुआ है. उन्होंने कहा कि प्रदेश अब ‘बाहुबली युग’ से आगे बढ़कर ‘बायोयुग’ की ओर अग्रसर है, जहां विकास, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता एक साथ आगे बढ़ रहे हैं.
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विकेटी/डीकेपी