
तिरुनेलवेली, 1 अगस्त . तमिलनाडु सरकार के मंत्री निर्मल कुमार ने शनिवार को कहा कि कर्नाटक से कावेरी जल में अपना उचित हिस्सा पाने के लिए राज्य के पास Supreme Court जाना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है. उन्होंने आरोप लगाया कि पड़ोसी राज्य में लगातार बनी सरकारों ने तमिलनाडु को पानी देने में अनिच्छा दिखाई है.
तिरुनेलवेली में पत्रकारों से बात करते हुए निर्मल कुमार ने कहा कि तमिलनाडु सरकार राज्य के हितों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी कि उसे कावेरी जल में अपना उचित हिस्सा मिले.
उन्होंने इस विवाद पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री के रुख की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु की चिंताओं को समझने में विफल रही है.
निर्मल कुमार ने केंद्रीय मंत्री पर कर्नाटक के बांध बनाने के प्रस्ताव का समर्थन करने और तमिलनाडु के हितों के खिलाफ काम करने का भी आरोप लगाया.
निर्मल कुमार के अनुसार, अंतरराज्यीय नदी जल विवाद को सुलझाने में अलग-अलग राज्यों की भूमिका सीमित होती है और जल बंटवारे से संबंधित फैसलों को लागू करने में केंद्र सरकार की अहम भूमिका होती है.
उन्होंने कहा, “चाहे कर्नाटक में भाजपा की सरकार हो या कांग्रेस की, उनका मकसद एक ही लगता है- तमिलनाडु को पानी न देना. इसलिए, कर्नाटक से पानी पाने के लिए हमारे पास Supreme Court ही एकमात्र समाधान है.”
पत्रकारों ने मंत्री से पूछा कि राहुल गांधी ने मौजूदा कावेरी विवाद पर सार्वजनिक रूप से कुछ क्यों नहीं कहा है और क्या उनके हस्तक्षेप से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को पानी छोड़ने के लिए मनाने में मदद मिल सकती है.
निर्मल कुमार ने कहा कि इस विवाद को केवल राजनीतिक हस्तक्षेप से हल नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि चूंकि कावेरी विवाद में दो राज्य शामिल थे और पानी के बंटवारे की कानूनी जिम्मेदारियां तय थीं, इसलिए Supreme Court के जरिए राहत पाना ही सही रास्ता था.
जब उनसे पूछा गया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कावेरी की स्थिति पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक कब बुलाएंगे, तो निर्मल कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ऐसी बैठक बुलाने के बारे में सही फैसला लेंगे.
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वीकेयू/पीएम