प्रणित मोरे की एफआईआर क्लब करने की मांग पर Supreme Court ने केंद्र, महाराष्ट्र और हरियाणा को भेजा नोटिस

नई दिल्ली, 21 सितंबर . ‘370 रुपए बिरयानी’ विवाद अब Supreme Court तक पहुंच गया है. स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे की उस याचिका पर Supreme Court ने केंद्र सरकार के साथ महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक साथ क्लब करने की मांग की है. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की.

मोरे की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से कहा कि अलग-अलग एफआईआर में आरोप लगभग एक जैसे हैं, इसलिए इन मामलों को एक साथ सुना जाना चाहिए.

Supreme Court में सुनवाई के दौरान मोरे के वकील ने बताया कि कॉमेडियन इस विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं. वह मामले में ट्रायल का सामना करने के लिए तैयार हैं. इस विवादित वीडियो को लेकर मामला शुरू हुआ, उसे एफआईआर दर्ज होने से पहले ही हटा दिया गया था. वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले मोरे की पीआर टीम ने उनसे मंजूरी नहीं ली थी.

इन दलीलों पर अब कोर्ट ने केंद्र सरकार, महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा गया है. अब अगर पूरे विवाद की बात करें तो इसकी शुरुआत गुरुग्राम में हुए प्रणित मोरे के एक स्टैंड-अप शो से हुई थी. इसी दौरान ऑडियंस में मौजूद हिमांशु जांगड़ा नामक युवक ने अपनी एक डेट का अनुभव सुनाया. उसने बताया कि डेट के दौरान उसने चिकन बिरयानी पर करीब 370 रुपए खर्च किए थे. इसके बाद उसने ऐसी टिप्पणी की, जिसे महिलाओं को लेकर बेहद आपत्तिजनक माना गया.

वायरल क्लिप में हिमांशु ने यह संकेत दिया था कि जब उसने डेट पर 370 रुपए खर्च किए हैं, तो उसे बदले में शारीरिक संबंध की उम्मीद थी. जब लड़की ने उसे घर छोड़ने के लिए कहा, तब भी उसने अपने खर्च को लेकर ‘वसूल’ करने जैसी बात कही.

वायरल वीडियो में प्रणित मोरे हिमांशु की बात पर हंसते दिखाई दिए और उन्होंने इसे ‘पीक गुरुग्राम कंटेंट’ कहा. इस मामले पर आलोचकों का कहना था कि ऐसी बात पर रोक लगाने या उसे गंभीरता से लेने के बजाय मोरे ने हंसकर उसे आगे बढ़ाया.

मामला बढ़ने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस पर संज्ञान लिया. आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को तलब किया था और हरियाणा के पुलिस महानिदेशक से भी मामले में कार्रवाई करने को कहा था. आयोग की ओर से कहा गया था कि वायरल वीडियो में कही गई बातें महिला के खिलाफ जबरदस्ती और सहमति जैसे गंभीर मुद्दों को हल्के में लेने वाली नजर आती हैं. इसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने भी मामले में एफआईआर दर्ज की.

इस विवाद को लेकर महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने भी प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. वहीं, गुरुग्राम में भी मामले को लेकर पुलिस कार्रवाई हुई. इस तरह एक ही विवाद से जुड़े मामले अलग-अलग राज्यों तक पहुंच गए, जिसके बाद मोरे ने Supreme Court का रुख किया.

विवाद बढ़ने के बाद प्रणित मोरे ने सोशल मीडिया पर माफी भी मांगी थी. उन्होंने वीडियो जारी करते हुए कहा कि उन्हें उस बातचीत के दौरान हस्तक्षेप करना चाहिए था लेकिन वह भीड़ की प्रतिक्रिया में बह गए थे. दूसरी ओर, हिमांशु जांगड़ा को भी इस विवाद के बाद अपनी नौकरी गंवानी पड़ी.

पीके/पीएम