
नई दिल्ली, 11 अगस्त . ओडिशा के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति का मामला Supreme Court पहुंच गया है. शीर्ष अदालत ने उस याचिका पर बुधवार को सुनवाई करने का भरोसा दिया है, जिसमें राज्य सरकार पर डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया में Supreme Court के ही साल 2018 के ‘प्रकाश सिंह मामले’ के दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया गया है.
मामले की पैरवी करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम पेश हुए. उन्होंने अदालत का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आमतौर पर पुलिस महकमे के अधिकारी ऐसी याचिकाएं दायर करने से बचते हैं.
याचिकाकर्ता की अहमियत और पृष्ठभूमि बताते हुए चिदंबरम ने अदालत को जानकारी दी कि याचिकाकर्ता एक स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने ही ओडिशा के बहुचर्चित ‘चिट फंड घोटाले’ को भी उजागर करने का साहसिक काम किया था.
अदालत के सामने अपनी मुख्य दलील रखते हुए पी. चिदंबरम ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह एक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) को पदोन्नत करने की कोशिश कर रही है. इसके पीछे सरकार की मंशा उस अधिकारी को डीजीपी पद के लिए पात्र अधिकारियों की सूची में शामिल करने की है.
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने पिछली सुनवाई का हवाला दिया. सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट करते हुए कहा कि पिछली सुनवाई में अदालत ने यह साफ कर दिया था कि यदि राज्य सरकार की ओर से किसी भी तरह का उल्लंघन होता है, तो संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को उस पर कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है.
उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि यदि कोई उल्लंघन हुआ है तो यूपीएससी हमारे फैसले के अनुसार ही उचित कार्रवाई करेगा.”
बहस के दौरान याचिकाकर्ता के वकील पी. चिदंबरम ने अपनी बात फिर से दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार जानबूझकर एक एडीजीपी को पदोन्नत कर डीजीपी चयन के लिए तैयार की जाने वाली सूची में शामिल करने का प्रयास कर रही है.
दोनों पक्षों की बातों को संज्ञान में लेते हुए, Supreme Court ने याचिकाकर्ता को भरोसा दिया है कि वह इस पूरे मामले पर बुधवार विस्तार से सुनवाई करेगा.
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वीकेयू/एबीएम