जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन मामले में Supreme Court बनाएगा हाई पावर्ड फैक्ट फाइंडिंग कमेटी, सीसीटीवी फुटेज की होगी जांच

नई दिल्ली, 18 अगस्त . Supreme Court ने मंगलवार को एक हाई पावर्ड फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का फैसला किया. यह कमेटी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक छात्रों के मार्च के सीसीटीवी फुटेज की जांच करेगी और पुलिस की कार्रवाई के आरोपों की भी पड़ताल करेगी.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पार्टियों से उन पूर्व जजों, पूर्व डीजीपी या रिटायर्ड सीबीआई डायरेक्टरों के बारे में सुझाव मांगे, जिन्हें उस पैनल में शामिल किया जा सके जो इस बात की जांच करेगा कि क्या नीट पेपर लीक और दूसरी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया था.

Supreme Court दिल्ली और बिहार में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.

इससे पहले की सुनवाई में Supreme Court ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और सिर्फ इसलिए ‘लाठीचार्ज’ को सही नहीं ठहराया जा सकता कि विरोध प्रदर्शन हो रहा है.

मंगलवार को Supreme Court ने कहा कि फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी (तथ्यों की जांच करने वाली समिति) से समय-समय पर रिपोर्ट देने के लिए कहा जा सकता है ताकि बेंच जरूरी निर्देश दे सके, खासकर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन उत्पीड़न और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों को देखते हुए.

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “जो भी इसके लिए जिम्मेदार है, उसके लिए कोई बहाना या कोई औचित्य नहीं हो सकता. इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए. इसीलिए हम एक हाई पावर्ड कमेटी (उच्चस्तरीय समिति) बना रहे हैं. यह कमेटी इन मामलों के हर पहलू की जांच करेगी.”

हालांकि, सीजेआई ने कहा कि फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी, सर्विलांस और प्राइवेसी से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों पर फैसला Supreme Court खुद करेगा, न कि कमेटी.

उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं को भी हाई पावर्ड कमेटी के सामने सीधे अपनी बात रखने का मौका मिल सकता है.

यह मामला 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प से जुड़ा है, जिसके दौरान संसद में घुसने की संभावित कोशिश को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था.

बेंच ने संकेत दिया कि वह छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए आर्टिकल 142 (पूरा न्याय करने के लिए Supreme Court की असाधारण शक्ति) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने पर विचार करेगी, लेकिन गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों से जुड़े मामलों को अलग से देखा जा सकता है.

Supreme Court ने राज्य सरकारों को उन एफआईआर की लिस्ट देने का भी निर्देश दिया जिनमें सिर्फ विरोध करने वाले छात्रों के नाम हैं, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है.

छात्रों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने का संकेत देते हुए Supreme Court ने कहा कि यह युवाओं के जीवन और भविष्य से जुड़ा सवाल है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “उनके माता-पिता उनकी पढ़ाई पर अपनी मेहनत की कमाई खर्च कर रहे हैं. उन्हें अपना भविष्य बनाना है. सिस्टम से उनकी जायज उम्मीदें हैं.”

एससीएच/वीसी