नीट पेपर लीक प्रदर्शन मामले में प्रदर्शनकारियों को ‘सुप्रीम’ राहत, 18 अगस्त को अगली सुनवाई

नई दिल्ली, 3 अगस्त . नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को Supreme Court में सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अदालत की कार्यवाही और मामले में हुई चर्चा की जानकारी दी.

अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि Supreme Court ने अपने पहले के आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिन लोगों के खिलाफ हत्या, डकैती जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में एफआईआर दर्ज है, उनके मामलों में जांच जारी रहेगी. हालांकि, जो लोग केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थे, उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी. अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा.

उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि पुलिस आयुक्त और संबंधित एजेंसियों से आवश्यक निर्देश अभी प्राप्त नहीं हुए हैं. निर्देश मिलने के बाद उनकी ओर से विस्तृत जवाब अदालत में दाखिल किया जाएगा. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन ने अदालत के समक्ष यह मांग रखी कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग का इस्तेमाल कब, किस परिस्थिति में और किसके आदेश पर किया गया, इसका पूरा रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश किया जाए.

अधिवक्ता त्रिपाठी ने बताया कि मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है. इससे पहले Supreme Court के पिछले आदेश के अनुसार संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को अपना-अपना हलफनामा दाखिल करना होगा. इसके साथ ही पुलिस आयुक्त और अन्य एजेंसियों की ओर से भी जवाब दाखिल किए जाने की उम्मीद है.

अदालत ने संकेत दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी या किसी हाई पावर कमेटी का गठन किया जा सकता है. 18 अगस्त की सुनवाई तक राज्यों के हलफनामे और पुलिस का जवाब अदालत के समक्ष आ जाएगा, जिसके बाद जांच के लिए किसी समिति या एजेंसी के गठन पर निर्णय लिया जा सकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई में इस दिशा में कोई ठोस निष्कर्ष सामने आएगा.

पैलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे पर अधिवक्ता ने कहा कि Supreme Court ने मौखिक टिप्पणी करते हुए संकेत दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में पैलेट गन के उपयोग को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा सकती है, जिसमें यह तय होगा कि किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के तहत इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में इसी एसओपी की सिफारिशों के आधार पर पैलेट गन के उपयोग को नियंत्रित किया जाएगा. इस मामले की अगली सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी.

पीएसके/एबीएम