मध्य प्रदेश के नीमच में स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज का हुआ भव्य स्वागत

नीमच, 11 जुलाई . मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक संत सम्मेलन में शामिल होने के लिए शनिवार को पहुंचे आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज का भव्य स्वागत किया गया. रास्ते में हजारों श्रद्धालु उनका आशीर्वाद लेने के लिए जमा हुए थे.

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि के आगमन से नीमच धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बन गया, क्योंकि पूरे जिले और आस-पास के इलाकों से भक्त उनके स्वागत के लिए इकट्ठा हुए. एयरपोर्ट से संत सम्मेलन स्थल तक की सड़कों को सजाया गया था, और शहर भर में हर हर महादेव के जयकारे और भक्तिपूर्ण नारे गूंज रहे थे.

आयोजकों के अनुसार, शहर में अलग-अलग जगहों पर स्वागत के लिए लगभग 85 मंच बनाए गए थे. हर पड़ाव पर, भक्तों और सामाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज का फूलों की वर्षा, मालाओं और पारंपरिक सम्मान के साथ स्वागत किया.

समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों, जिनमें महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भक्त शामिल थे. उन्होंने इस स्वागत समारोह में हिस्सा लिया. अलग-अलग समुदायों के लोग भी स्वागत जुलूस में शामिल हुए, जिससे इस धार्मिक आयोजन में व्यापक भागीदारी दिखी.

आयोजकों का दावा है कि संत की एक झलक पाने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए लाखों भक्त जुटे, हालांकि भीड़ का कोई आधिकारिक अनुमान तुरंत उपलब्ध नहीं था.

संत सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से संतों, ऋषियों और धार्मिक गुरुओं के शामिल होने की उम्मीद है.

आयोजकों ने कहा कि इस आयोजन का मकसद धार्मिक प्रवचनों और संतों के बीच बातचीत के ज़रिए सनातन धर्म, आध्यात्मिक जागरूकता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाना है.

जिला प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और ट्रैफिक के व्यापक इंतजाम किए थे. रास्ते में अहम जगहों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि स्वयंसेवकों ने भक्तों की मदद की और जुलूस को सुचारू रूप से चलाने के लिए भीड़ को संभाला.

स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज के आगमन से पूरे शहर में भक्तिमय माहौल बन गया. दिन भर मंदिरों, बाजारों और सार्वजनिक जगहों पर भक्तों का तांता लगा रहा.

आयोजकों ने इस स्वागत समारोह को हाल के वर्षों में जिले में हुए सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक बताया और कहा कि लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रिया आचार्य और सनातन परंपरा के मूल्यों के प्रति उनकी गहरी आस्था और सम्मान को दर्शाती है.

डीकेएम/डीएससी