
श्रीनगर, 20 अप्रैल . स्वामी विश्वानंद सरस्वती ने हाल ही में के साथ बातचीत में पहलगाम हमले को निंदनीय बताया. उन्होंने कहा कि यदि कोई समुदाय अपने धर्म या समुदाय के लिए लड़ता भी है तो उसकी एक सीमा होनी चाहिए. उस हद से आगे बढ़ना एकदम गलत है.
उन्होंने कहा, “इस घटना के बाद से कई देशों के मुस्लिम समुदाय के लोगों की छवि खराब हुई है. हाल ही में मैंने एक वीडियो देखा, जिसमें एक व्यक्ति से पूछा गया कि वह कहां से हैं तो उसने जब कश्मीर बताया, तो कई लोग उसे गलत नजर से देखने लगे. कई लोगों ने किराए के कमरे खाली करवाना शुरू कर दिए.”
स्वामी जी ने जोर देते हुए कहा कि धर्म गुरुओं को इस मुद्दे पर आगे आना चाहिए. उन्होंने कहा, “धर्म गुरु हर व्यक्ति तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं. सरकार तो सिर्फ एक-दो लोगों तक ही पहुंच सकती है, लेकिन धर्म गुरु पूरे समुदाय को समझा सकते हैं. सभी समुदायों के धर्म गुरुओं को अपने लोगों को बताना चाहिए कि ऐसी निंदनीय घटनाएं नहीं करनी चाहिए, जिससे पूरे समुदाय की छवि खराब हो.”
उन्होंने आगे आदि शंकराचार्य के सिद्धांतों को लेकर अपना बात रखी. उन्होंने कहा, “आदि गुरु शंकराचार्य का संदेश किसी एक समुदाय, धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए था, जिसे ‘अद्वैत सिद्धांत’ कहा जाता है. इसमें चाहे कोई भी जाति हो, कोई भी धर्म हो, कोई भी समाज या समुदाय हो, सब एक हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “एक समय था, जब भारत और पूरी दुनिया में अद्वैत सिद्धांत का बोलबोला था. उस समय लोग इस सिद्धांत का पालन किया करते थे. उस दौर में अपराध नाम नहीं हुआ करता था. आज भी अगर हम शंकराचार्य के इस सिद्धांत को अपनाएं, जिसमें जाति, मजहब या किसी भी तरह का भेदभाव न हो तो समाज में शांति और एकता कायम हो सकती है.”
स्वामी विश्वानंद सरस्वती ने कहा कि आज भी दुनिया के कई देशों में हमारे महात्मा संस्थाएं चलाकर सही मार्गदर्शन दे रहे हैं. उन्होंने कहा, “जिन समाज और देशों ने इस एकता के सिद्धांत को अपनाया है, वहां के लोग नशे और अपराध जैसी बुराइयों को भूल गए हैं. इसलिए हमें लोगों को इन बातों के प्रति जागरूक करना चाहिए.”
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एनएस/डीकेपी