
रायचूर, 20 सितंबर . कर्नाटक के रायचूर में ऐतिहासिक ‘किल्ले बृहन्मठ’ के स्वर्गीय श्री गुरुपाद शिवाचार्य स्वामीजी की याद में रविवार को 21वीं सद्भावना पदयात्रा निकाली गई. इस सद्भावना पदयात्रा की एक खास बात रोबोटिक हाथी का इस्तेमाल थी. इस रोबोटिक हाथी को बिल्कुल असली हाथी जैसा दिखने और लगने के लिए डिजाइन किया गया है.
‘पेट इंडिया’ नाम की संस्था ने मठ को यह रोबोटिक हाथी दान में दिया था. ऐसे धार्मिक आयोजनों में हजारों लोग इकट्ठा होते हैं. भीड़ और तेज आवाज वाले संगीत के बीच असली हाथी के होने से जानवर डर और बेचैनी महसूस कर सकता है, जिससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं. जानवरों के साथ क्रूरता रोकने और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए रोबोटिक हाथी का इस्तेमाल किया जा रहा है.
रविवार को मठ में पूरे विधि विधान के साथ इस रोबोटिक हाथी को रखा गया. मंदिर के अध्यक्ष श्री 108 साविर देवरा शांतमल्ला शिवाचार्य महास्वामीजी ने से बातचीत में कहा कि ‘पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया’ (पेटा इंडिया) ने मठ को यह रोबोटिक हाथी दान किया है. इसके लिए शिवाचार्य महास्वामीजी ने पेटा इंडिया और सीयूपीए को धन्यवाद दिया.
उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह मंदिर में केवल एक नई चीज का जुड़ना नहीं है. यह हमारी परंपराओं को ऐसे तरीके से मनाने की दिशा में एक कदम है जो दया और बदलते समय को दर्शाता है. रोबोटिक हाथी भक्तों को हमारे समारोहों से जुड़ी सुंदरता और गरिमा का अनुभव करने का मौका देता है, साथ ही हमें यह भरोसा भी दिलाता है कि मंदिर के उत्सवों के लिए किसी असली हाथी को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी.
यह रोबोटिक हाथी 3 मीटर ऊंचा और 500 किलो वजन वाला हैं. ये रबर, फाइबर, मेटल, मेश, फोम और स्टील से बना है और यह पांच मोटरों से चलता है. एक रोबोटिक हाथी असली हाथी जैसा दिखता और महसूस होता है.
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डीसीएच/