यह पाकिस्तान का पुराना एजेंडा है कि कैसे भी जम्मू-कश्मीर का इस्लामीकरण किया जाए: एसपी वैद्य

श्रीनगर, 12 अगस्त . पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने कश्मीरी पंडितों के लिए यूएलसी के खतरे, सर्वानंद प्रेमी हत्याकांड में एसआईए की छापेमारी, जनसांख्यिकीय पैनल टीम के दौरे और प्रज्वल रेवन्ना द्वारा जेल के अंदर मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर अपनी बात रखी.

पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने बुधवार को समाचार एजेंसी से बातचीत में सर्वानंद प्रेमी हत्याकांड मामले पर कहा कि इस मामले को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अपने हाथ में लिया है. इसी सिलसिले में अनंतनाग और बाकी के अन्य इलाकों में रेड भी किए गए हैं. मुझे लगता है कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण है. इस तरह से इन लोगों को एक एक करके पूरा मामला उठाना चाहिए. हालांकि, Supreme Court ने इस मामले में एसआईटी गठित करने से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन पुलिस का यह फर्ज बनता है कि लोगों को इंसाफ दिलाया जाए. हालांकि, अब इस पूरे मामले में देर हो चुकी है. 36 साल एक बहुत लंबा समय होता है. अब इस मामले में कई गवाह जिंदा भी होंगे कि नहीं, इस बारे में भी हमें कोई जानकारी नहीं है. इसके बावजूद हम इस पूरे मामले में जो कर सकते हैं, वो कर सकते हैं. मैं कुल मिलाकर यही कहूंगा कि अगर इस मामले में पर्याप्त सबूत मिलता है, तो निश्चित तौर पर चालान करना चाहिए.

साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान पर भी निशाना साधा. उनके मुताबिक, पाकिस्तान का यह पुराना एजेंडा है कि कैसे भी करके जम्मू-कश्मीर का इस्लामीकरण किया जा सके. इसी के तहत इन लोगों ने 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों का कत्लेआम किया था और बाकी के लोगों को रेडिक्लाई किया था. ऐसी स्थिति में इन लोगों के लिए कश्मीरी पंडित सॉफ्ट टारगेट है. खासकर उन लोगों के लिए जिन्होंने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में अपनी तरफ से योगदान दिया था. खासकर, इन लोगों ने स्पेशल पैकेज के तहत काम किया था. ये लोग कई आम लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं, जिसमें टीचर भी शामिल हैं. आज की तारीख में पाकिस्तान के हालात कैसे बने हुए हैं, यह बात हमसे छुपी नहीं है. यह चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को अटेंशन मिले. सेना पर तो यह हमला नहीं कर सकते हैं. इसी वजह से ये लोग कमजोर तबके के लोगों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें लेबर, कश्मीरी पंडित और बाहरी लोग शामिल हैं. इस तरह की हरकत ये लोग करते रहते हैं.

साथ ही, उन्होंने जनसांख्यिकीय पैनल टीम के दौरे पर भी अपनी बात रखी. उनके मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से यह कमीशन बनाया गया है. यह लोग विशेष रूप से उन सभी इलाकों का दौरा कर रहे हैं, जिसमें विशेष रूप से डेमोग्राफी को बदला गया है. आने वाले दिनों में कमीशन अपनी पूरी स्टडी के साथ इस तथ्य को उजागर करेगा. मुझे लगता है कि जिन लोगों से वह जम्मू में मिले हैं, उन सभी लोगों को इन्होंने फैक्ट और फीगर के साथ डिटेल्स दी होगी. सीमावर्ती इलाकों जैसे बांग्लादेश और नेपाल से सटी सीमाओं पर डेमोग्रॉफी को बदलने की कोशिश की गई है. इस तरह के कई इलाकों में डेमोग्राफी बदलने की कोशिश की गई है. कमीशन सभी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट को सरकार के सामने प्रस्तुत करेगा. हमारी संस्कृति सबसे पुरानी है. ऐसी स्थिति में अगर कोई हमारी संस्कृति को खत्म करने की कोशिश करता है तो उसे बचाने की दिशा में जरूरी कदम उठाए जाए, ताकि सिर्फ हम अपनी संस्कृति को बचा सके. इसी तरह से डेमोग्रॉफी को बदलने की कोशिश यूरोप में भी हो रहा है , जिसका असर पूरी दुनिया में हो रहा है. अब इसी तरह की स्थिति भारत में भी पैदा हो रही है . ऐसी स्थिति में भारत सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है कि अवैध रूप से रह रहे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे. हमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या से अपने देश को बचाना चाहिए. इनमें से कई लोग गजवा ए हिंद की विचारधारा रखते हैं.

वहीं, उन्होंने प्रज्वल रेवन्ना द्वारा जेल के अंदर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए. हां, लेकिन यह बात सच है कि कुछ कैदियों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाता है. यह सिर्फ कर्नाटक में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में हो रहा है. हमारे यहां सेंट्रल जेल में भी इस तरह की स्थिति देखने को मिली थी. हमारा यह मानना है कि केंद्रीय समीक्षा होनी चाहिए. इसका प्रशिक्षण होना चाहिए. इसकी नियुक्ति सरकार की ओर से होनी चाहिए. कैदियों की बहुत बुरी हालत है. राज्य की ओर से इसे अनदेखा किया जाता है. जेल में सीमा से अधिक कैदी होते हैं. वहां गंदगी होती है. ऐसी स्थिति में सरकार को उचित कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए. हमें नियमों के हिसाब से चलना चाहिए कि किसी को भी वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मिलना चाहिए, चाहे वो कोई भी क्यों न हो.

एसएचके/डीकेपी