
गांधीनगर, 9 सितंबर . गुजरात विधानसभा का नौवां सत्र बुधवार को शुरू हुआ. सत्र के पहले दिन सदन ने पांच दिवंगत वर्तमान और पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उनके सार्वजनिक जीवन और योगदान को याद किया.
15वीं गुजरात विधानसभा के नौवें सत्र के पहले दिन सीएम भूपेंद्र पटेल ने दिवंगत नेताओं के लिए शोक प्रस्ताव पेश किए. इनमें पूर्व राज्य मंत्री और 15वीं विधानसभा के वर्तमान सदस्य योगेश पटेल, पूर्व मंत्री मोहनसिंह राठवा, पूर्व राज्य मंत्री ललित कुमार पटेल, तथा पूर्व विधायक पोपटलाल पटेल और सुनीलभाई गावित शामिल थे.
मुख्यमंत्री ने इन नेताओं को श्रद्धांजलि देते हुए उनके निधन पर दुख व्यक्त किया और जनप्रतिनिधि के रूप में उनके कार्यों तथा जनता की सेवा में दिए गए योगदान को याद किया.
विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी के साथ-साथ राज्य के मंत्रियों और सत्तारूढ़ तथा सहयोगी दलों के सदस्यों ने भी शोक व्यक्त किया और दिवंगत नेताओं के योगदान को याद किया.
इसके बाद सदन ने दिवंगत नेताओं की याद में दो मिनट का मौन रखा और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.
यह शोक प्रस्ताव तीन दिवसीय विधानसभा सत्र की शुरुआती कार्यवाही का हिस्सा था. यह सत्र 9 सितंबर से 11 सितंबर तक चलेगा.
यह 15वीं गुजरात विधानसभा का नौवां सत्र है. सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी की अध्यक्षता में कार्य सलाहकार समिति (बिजनेस एडवाइजरी कमेटी) की बैठक हुई थी, जिसमें विधायी कार्यों और विभिन्न विधेयकों के कार्यक्रम पर चर्चा की गई.
बैठक में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, संसदीय कार्य मंत्री ऋषिकेश पटेल, वित्त मंत्री कनुभाई देसाई, वरिष्ठ मंत्री कुर्जीभाई बावलिया, कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी और सदन के उपनेता शैलेश परमार मौजूद थे.
सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघाणी ने बताया था कि समिति ने तीन दिन के सत्र के दौरान विधेयकों को किस क्रम में पेश किया जाएगा, इस पर चर्चा की.
उन्होंने यह भी कहा था कि विधानसभा की संसदीय और विधायी प्रक्रियाओं के तहत दिवंगत वर्तमान और पूर्व विधायकों के लिए शोक प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई.
राज्य सरकार ने इस सत्र में विचार के लिए नौ विधेयकों को सूचीबद्ध किया है. इनमें कृषि विश्वविद्यालय, प्राकृतिक खेती विज्ञान, किराया व्यवस्था, पशु एवं पोल्ट्री चारा नियमन, भूमि राजस्व, कृषि भूमि के विखंडन की रोकथाम, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा, कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े विषय शामिल हैं.
तीन दिवसीय सत्र के दौरान राज्य सरकार इन विधेयकों को सदन में पेश करेगी और उन पर चर्चा होगी. वहीं, विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों को उठाने की तैयारी में है.
सदन के विधायी कार्यों का अंतिम क्रम विधानसभा अध्यक्ष तय करेंगे और उसकी घोषणा सदन में की जाएगी.
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एएमटी/डीकेपी