
नई दिल्ली, 3 जुलाई . भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई की शुरुआत में इंडोनेशिया समेत दो अन्य देशों के दौरे पर जाने वाले हैं. पीएम मोदी के दौरे से पहले भारत राज्यसभा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक साझेदारी कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम से इतर उन्होंने न्यूज एजेंसी से पीएम के दौरे, समुद्री निगरानी के लिए ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का महत्व और इस पर कांग्रेस के राजनीतिक हंगामा समेत अन्य मुद्दों पर खास बातचीत की.
राज्यसभा सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे और इसके रणनीतिक महत्व और इससे साझेदारी कैसे मजबूत होगी, समुद्री निगरानी के लिए ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का महत्व, भू-राजनीतिक तनाव के बीच जापान की पीएम का भारत दौरा और इसके रणनीतिक महत्व, अमेरिका-इजरायल को ईरान की चेतावनी और खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार पर बात की.
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट और सबांग पोर्ट प्रोजेक्ट के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर देते हुए हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा, “इंडोनेशिया में हमारे राजदूत संदीप चक्रवर्ती, जिन्होंने इस फोरम में हमें ऑनलाइन संबोधित किया, ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट और सबांग पोर्ट प्रोजेक्ट के बीच जो तालमेल बना सकते हैं, उस पर गौर करें. दूसरे शब्दों में, ये जरूरी पोर्ट हैं जिन्हें विकसित किया जा रहा है और हमें एक-दूसरे के पूरक और तालमेल बनाने की जरूरत है. भारत पहले भी सबांग पोर्ट के साथ जुड़ा रहा है और मुझे लगता है कि यह जरूरी है कि हम उस सहयोग को जारी रखें ताकि हम इन दोनों पोर्ट को समुद्री व्यापार मार्गों में महत्वपूर्ण बिंदु बना सकें. ये बहुत महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग हैं और वे एक-दूसरे को मजबूत भी करें, जो हमारे रणनीतिक और समुद्री सहयोग का एक जरूरी हिस्सा है.”
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के भारत दौरे और भू-राजनीतिक तनाव के बीच इसके रणनीतिक महत्व को लेकर राज्यसभा सांसद ने कहा, “यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण दौरा है. उन्हें स्थिरता और निरंतरता के लिए चुनावी जनादेश दिया गया है. हमारे पास भी पीएम मोदी के रूप में ऐसे नेता हैं जिन्हें हमारे लोगों से भी बहुत मजबूत जनादेश मिला है. इसलिए, काफी समय बाद, दोनों नेता एक साथ आ रहे हैं. यह हमारे बहुत महत्वपूर्ण दोस्त, जापान के साथ एक नई रणनीतिक साझेदारी और सहयोग की पहचान है. हिंद-प्रशांत में, यह द्विपक्षीय संबंधों से परे सहयोग का एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र बन जाएगा.”
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल को लेकर पूर्व विदेश सचिव ने कहा, “इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन से बात की और अंतिम संस्कार समारोह के लिए भारत की ओर से शोक व्यक्त किया. हमने बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री डॉ. पबित्रा मार्गेरिटा को भी भेजा है. मुझे लगता है कि हमारी ओर से यह एक बेहद मजबूत प्रतिनिधिमंडल है और यह भारत तथा ईरान के बीच सभ्यतागत, ऐतिहासिक और समकालीन संबंधों की मजबूती को दर्शाता है.”
पीएम मोदी के आगामी विदेश दौरे के रणनीतिक महत्व को लेकर उन्होंने कहा, “भारत और इंडोनेशिया बहुत जरूरी साझेदार हैं. हमें खुद को पड़ोसी के तौर पर देखना होगा; ग्रेटर निकोबार से बांदा आचेह सिर्फ 100 मील दूर है. इसलिए, यह बहुत पास है. पीएम मोदी का दौरा बहुत अहम है क्योंकि इससे इंडोनेशिया के साथ मौजूदा साझेदारी और मजबूत होगी. वह 2018 में वहां थे और राष्ट्रपति प्रबोवो पिछले साल गणतंत्र दिवस पर हमारे मुख्य अतिथि थे.”
पूर्व विदेश सचिव ने कहा, “हमारी नींव मजबूत है और हम एक जरूरी साझेदार के साथ मिलकर उसे मजबूत कर रहे हैं और आगे बढ़ा रहे हैं. पीएम मोदी का इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरे को हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ हमारे जुड़ाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. यह हमारे क्षेत्रीय और वैश्विक पहुंच का एक ऐसा पहलू है जिसे कम नहीं आंका जा सकता. यह बहुत जरूरी है.”
–
केके/एएस