
कोलकाता, 8 सितंबर . पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं. इसके लिए पूर्वी मिदनापुर के जिलाधिकारी निरंजन कुमार ने मंगलवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसमें अपना कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा.
सोमवार को नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद जिलाधिकारी कुमार ने शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने पर चर्चा के लिए जिले स्तर पर सर्वदलीय बैठक बुलाई थी.
हालांकि, राज्य की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने इस सर्वदलीय बैठक में अपने प्रतिनिधि भेजे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं था. तृणमूल कांग्रेस ने 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल में शासन किया है.
स्वाभाविक रूप से राज्य के राजनीतिक हलकों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या तृणमूल कांग्रेस नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कोई उम्मीदवार उतारने की स्थिति में भी होगी या नहीं.
शहर के एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि वैसे भी, पश्चिम बंगाल विधानसभा में पूर्वी मिदनापुर से तृणमूल कांग्रेस की मौजूदगी शून्य है, क्योंकि इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने उस जिले की सभी 16 सीटें जीती थीं. दूसरी बात, चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस अब तीन गुटों में बंट गई है. ऐसे हालात में, सर्वदलीय बैठक में तृणमूल का कोई प्रतिनिधि न भेजना अपने आप यह सवाल खड़ा करता है कि क्या राज्य की पूर्व सत्ताधारी पार्टी नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कोई उम्मीदवार उतार पाएगी या नहीं.
इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों में मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम और दक्षिण कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट, दोनों जगहों से चुने गए थे.
भवानीपुर में अधिकारी ने अपनी पूर्ववर्ती और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 15,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था.
इसके बाद, मुख्यमंत्री अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी, जिससे नंदीग्राम में उपचुनाव की जरूरत पड़ी.
2021 से, सुवेंदु अधिकारी की वजह से नंदीग्राम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक मजबूत गढ़ बन गया था. इसलिए, राजनीतिक जानकारों को वहां होने वाले उपचुनावों के नतीजों को लेकर कोई शक नहीं है.
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एमएस/