
अंकारा, 8 जुलाई . अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कई बड़े नाटो सहयोगी देशों पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में उसका साथ देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि यह देखकर उन्हें निराशा हुई, खासकर तब जब अमेरिका ने कई दशकों से यूरोप की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाई है.
अंकारा में नाटो नेताओं की बैठक से पहले नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समर्थन मांगा तो नाटो उस महत्वपूर्ण परीक्षा में खरा नहीं उतरा. ट्रंप ने ईरान को ‘आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक देश’ बताया.
ट्रंप ने कहा कि मैं नाटो से खुश नहीं हूं, क्योंकि जब हमें आतंकवाद के सबसे बड़े समर्थक देश ईरान के खिलाफ मदद चाहिए थी, तो उन्होंने हमारी मदद नहीं की. वे हमारी मदद करने के लिए तैयार नहीं थे. अमेरिका को वास्तव में सैन्य मदद की जरूरत नहीं थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर यह देखना चाहा कि उनके सहयोगी देश किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं.
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने खुद कई यूरोपीय नेताओं से बात की थी. उन्होंने कहा कि मैंने जर्मनी से बात की, फ्रांस से बात की, ब्रिटेन से बात की और इटली से भी बात की. मैंने स्पेन से बात नहीं की. स्पेन तो एक बेकार मामला है.
ट्रंप ने कहा कि इसी तरह मैंने जर्मनी से बात की, उन्होंने मदद नहीं करनी चाही. फ्रांस से बात की, उन्होंने भी मदद नहीं की. कोई भी मदद के लिए तैयार नहीं था. केवल नाटो के कुछ छोटे देशों ने समर्थन देने की इच्छा दिखाई.
हालांकि, नाटो महासचिव मार्क रूटे ने गठबंधन का बचाव करते हुए कहा कि यूरोपीय सहयोगियों ने अमेरिका के अभियान में काफी महत्वपूर्ण मदद दी थी.
रूटे ने कहा कि ‘एपिक फ्यूरी’ अभियान के समर्थन में यूरोपीय हवाई अड्डों से 5,000 विमान उड़ान भर चुके थे. यूरोप ने एक बड़े शक्ति केंद्र की तरह अमेरिका को अभियान चलाने के लिए अपना पूरा समर्थन और सुविधाएं दीं. रूटे ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और कई अन्य देशों ने सैन्य ठिकानों तक पहुंच और दूसरी जरूरी सुविधाएं देकर अभियान में मदद की.
ट्रंप ने माना कि कुछ मदद जरूर मिली थी, लेकिन उनका कहना था कि बड़े सहयोगी देशों ने उनकी उम्मीद के मुताबिक साथ नहीं दिया.
–
एवाई/डीकेपी