ट्विशा शर्मा केस : रिद्धि डोगरा की युवाओं से हकीकत स्वीकारने की सलाह, कहा- ‘शादी सपने की तरह नहीं’

मुंबई, 22 मई . मशहूर अभिनेत्री रिद्धि डोगरा ने शुक्रवार को युवा पीढ़ी को शादी के बदलते मायनों से रूबरू करवाते हुए एक पोस्ट करके अपनी बात रखी. अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में सभी को वास्तविकता स्वीकार करने की सलाह दी. रिद्धि ने इंस्टाग्राम पर एक नोट शेयर करते हुए बताया कि पिछले कुछ सालों में शादी के बाद लड़कों और लड़कियों, दोनों के साथ कई दिल तोड़ देने वाली घटनाएं हुई हैं, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है.

अभिनेत्री ने लिखा, “सभी को बता दूं कि यह साल 2026 है. लड़के और लड़कियां कृपया शादी को किसी सपनों की कहानी की तरह देखना बंद करें. आपके माता-पिता जिस समय बड़े हुए थे, वो दुनिया अलग थी और आज के समय शादी के मायने भी बदल गए हैं. लड़कों को इस बात को समझना चाहिए कि आज के समय लड़कियां हर बात आंख बंद करके नहीं मानेंगी. कानून और समाज ने मिलकर महिलाओं को पहले से कहीं अधिक मजबूत और स्वतंत्र बनाया है. आज की लड़कियां आत्मनिर्भर हैं, वे खुद नौकरी कर सकती हैं, अपना घर चला सकती हैं और स्वाभिमान के साथ जी सकती हैं. “

अभिनेत्री ने बताया कि आज के समय शादी कोई आर्थिक या सामाजिक सहारे की मजबूरी नहीं, बल्कि प्यार और इच्छा का विषय है. उन्होंने लिखा, “लड़कियों को समझना चाहिए कि लड़के भी इंसान हैं और बदलती दुनिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं. उनके लिए भी बहुत कुछ नया है, क्योंकि समाज की सोच और जिम्मेदारियां पहले से बदल चुकी हैं. मैं सभी को बस इतना ही कहना चाहती हूं कि भी परी कथा जैसी शादी की उम्मीद मत रखिए. खुद को शिक्षित बनाइए, अपने लिए जीना सीखिए और अपनी आवाज खुद उठाइए. यह उम्मीद मत कीजिए कि हमेशा कोई दूसरा आपके लिए खड़ा होगा.”

रिद्धि डोगरा ने सभी को शादी के मूल आधार को समझाते हुए लिखा कि शादी का फैसला केवल प्यार और आपसी आदर के लिए होना चाहिए. उससे शादी कीजिए, जिसे आप एक अच्छे इंसान के रूप में पसंद करते हैं. कोशिश कीजिए कि अपनी शादीशुदा जिंदगी में जरूरत से ज्यादा दूसरों का हस्तक्षेप न हो. एक सम्मानजनक शादी दो लोगों के बीच का रिश्ता है, भीड़ का नहीं. सच्चा नारीवाद सिर्फ समानता है. जब मैं मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवाज उठाती हूं, तो वह दोनों, महिला और पुरुष, के लिए समान रूप से होती है.”

उन्होंने स्पष्ट किया कि नारीवाद का उद्देश्य कभी भी पुरुषों को नीचा दिखाना या उन्हें कमजोर करना नहीं रहा है. इसकी शुरुआत भले ही बहुत गुस्से और एक बड़े आंदोलन के रूप में हुई थी, क्योंकि हर सामाजिक क्रांति की शुरुआत ऐसे ही होती है, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. आज महिलाओं के पास पर्याप्त अवसर हैं और जिस बराबरी के लिए पुरानी पीढ़ी ने लंबा संघर्ष किया था, वह आज असल जिंदगी में धरातल पर दिखाई दे रही है.

एनएस/एबीएम