
मुंबई, 3 जुलाई . भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने शुक्रवार को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला. उन्होंने उद्धव ठाकरे को पाकिस्तानी एजेंट बताते हुए उन्हें ‘उद्धव उल्ला हक’ और ‘उद्धव अल हक’ तक कह दिया.
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नितेश राणे ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे भारत विरोधी लोगों जैसी भाषा बोल रहे हैं और उनकी राजनीतिक सोच पूरी तरह बदल चुकी है.
राणे ने यह टिप्पणी उस घोषणा के बाद की, जिसमें उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन के विरोध में 5 जुलाई को दादर स्थित हनुमान मंदिर के पास ‘राम रक्षा’ आंदोलन की बात कही थी.
नितेश राणे ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे पाकिस्तान में बैठे अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए ऐसी भाषा बोल रहे हैं.
उन्होंने कहा, “जैसे पाकिस्तान में लोग भारत के खिलाफ बोलते हैं, उसी तरह उद्धव ठाकरे भी बोलते हैं. वह सिर्फ पाकिस्तान में बैठे अपने ‘अब्बा’ (मास्टर्स) को खुश करने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं.”
राम मंदिर के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे के रुख पर कटाक्ष करते हुए राणे ने कहा कि इस विषय पर उनकी भाषा ओसामा बिन लादेन जैसी लगती है. भाजपा कभी भी राम मंदिर को चुनावी मुद्दे के रूप में नहीं देखती.
राणे ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उद्धव ठाकरे के कार्यकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उनके शासनकाल में हिंदू मंदिरों को बंद रखा गया था. अब वह हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को बदनाम करने का नाटक कर रहे हैं. चाहे वह कितनी भी महाआरती कर लें, कोई देवी-देवता उन्हें आशीर्वाद नहीं देंगे, क्योंकि उनका राजनीतिक ‘धर्मांतरण’ हो चुका है.
नितेश राणे ने यह भी दावा किया कि उद्धव ठाकरे का भगवान राम से कोई वास्तविक संबंध नहीं है.
उन्होंने कहा, “उद्धव ठाकरे जिस भी मंदिर में जाएं, उसके बाद वहां गंगाजल या गोमूत्र से शुद्धिकरण किया जाना चाहिए. उनका भगवान राम से कोई संबंध नहीं है.”
राणे ने शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पार्टी के सांसद पहले केवल प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता और नेतृत्व की वजह से चुनाव जीत पाए थे. अब जनता का ठाकरे गुट से कोई जुड़ाव नहीं बचा है. महायुति के नेता मंदिरों में जाते समय अपना पद और राजनीतिक अहंकार बाहर छोड़ देते हैं, जबकि उद्धव ठाकरे की राजनीति अलग है.
इस बीच, महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता राम कुलकर्णी ने भी उद्धव ठाकरे के हिंदुत्व पर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा, “उद्धव ठाकरे को हनुमान चालीसा या राम रक्षा स्तोत्र पढ़ने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. मुख्यमंत्री रहते हुए उद्धव ठाकरे की सरकार ने केवल हनुमान चालीसा और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने वाले रामभक्तों को जेल भेजा था. मंदिर से जुड़े हालिया मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाना उद्धव ठाकरे की राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश है.”
राम कुलकर्णी ने कहा कि भाजपा ने कभी भगवान राम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया. राम मंदिर निर्माण इसलिए कराया गया क्योंकि भगवान राम भारत की सांस्कृतिक पहचान और आस्था के प्रतीक हैं. राम मंदिर निर्माण के लिए दशकों तक चले संघर्ष और आंदोलनों के बाद देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उदय देखा, जिसने करोड़ों हिंदुओं के सपने को पूरा किया और मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया.
राम मंदिर में हुई हालिया चोरी की घटना पर कुलकर्णी ने कहा कि यह एक अलग घटना है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है. दोषियों को सख्त सजा मिलेगी. लेकिन, आपकी ‘मशाल’ (पार्टी चुनाव चिन्ह) की लौ कमजोर पड़ रही है और शिवसेना उद्धव के प्रभाव से मुक्त हो रही है, इसलिए आप अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए मंदिर की इस घटना को मुद्दा बना रहे हैं.”
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एएमटी/एबीएम