अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन : ‘रिजीम चेंज’ की बहस के बीच चौंकाने वाले खुलासे, बांग्लादेश जैसे आंदोलन की भी ‘इच्छा’

नोएडा, 3 नवंबर . देशभर में रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर छिड़ी बहस के बीच ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ के अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन में कई खुलासे हुए हैं. स्टिंग ऑपरेशन में सामने आई बातचीत में यह संकेत मिले हैं कि कुछ लोग वोट के जरिए लोकतांत्रिक बदलाव के बजाय अन्य तरीकों से सत्ता परिवर्तन के मौके की तलाश में हैं.

स्टिंग ऑपरेशन के दौरान मुंबई में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के मुंबई चीफ मौलाना सिराज खान से रिपोर्टर ने सड़क पर फ्रांस जैसे हिंसक प्रोटेस्ट की संभावना को लेकर सवाल पूछा, जिस पर मौलाना ने गैर-मुस्लिमों की तरफ से सड़क पर उतरने की बात कही. मौलाना सिराज खान ने कहा, ”मोमिन जिस दिन खड़ा होगा, किसी के संभाले संभलेगा नहीं.”

इसी तरह भारत में नेपाल और बांग्लादेश जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका को लेकर सवाल पूछे जाने पर मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन के साफवान ने कहा, ”ये पक्का है कुछ तो होगा, सब कुछ लंबे वक्त तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकता. मुझे लगता है अगर फिर 20 जुलाई जैसा दिन आया तो नेपाल जैसे हालात हो सकते हैं.”

बांग्लादेश और नेपाल के लिए तैयार होने के सवाल पर साफवान ने कहा, “कुछ तो करना पड़ेगा.”

हाल ही में वोट चोरी को लेकर हुए प्रदर्शनों में लड़कियों की अग्रणी भूमिका ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया था. इस दौरान लड़कियां प्रदर्शनों की अगली कतार में दिखाई दी थीं. स्टिंग ऑपरेशन में प्रदर्शनों में लड़कियों को आगे रखने की कथित रणनीति को लेकर भी बातचीत सामने आई.

रिपोर्टर ने साफवान से पूछा, “प्रदर्शनों में लड़कियों को आगे करने का नया तरीका दिखा है?”

इस पर साफवान ने कहा, “हां, ऐसा कुछ है, वे किले की दीवार की तरह खड़ी हो जाती हैं और बाकी लोग अंदर आ जाते हैं. जब एक पुरुष पुलिस के सामने आता है तो वो पुलिस उसे काबू कर सकती है, लेकिन जब एक महिला, ‘पुरुष पुलिस’ वाले के सामने आती है तो इससे दिल्ली पुलिस की नकारात्मक छवि बनती है. ऐसा हो भी रहा है.”

अंडरकवर रिपोर्टर ने क्रांतिकारी युवा संगठन के कन्वीनर भीम से पूछा कि 20 जुलाई से पहले प्रदर्शनों में दरी और टेंट दिखाई देते थे, लेकिन बाद में पंखे, कूलर और दूसरी व्यवस्थाएं भी नजर आने लगीं. आखिर इन व्यवस्थाओं के लिए संसाधन कहां से आ रहे थे? इस सवाल के जवाब में भीम ने बताया कि करीब पांच लाख रुपए प्रतिदिन खर्च हो रहे थे.

उन्होंने कहा, “शुरू में, ये चीज पता चल गई थी. ज्यादातर आप के फैन थे, आम आदमी से जुड़े थे. बाउंसर कौन लेकर चलता है, जिसके पास कुछ नहीं है, वो बाउंसर लेकर चल रहा है.”

क्रांतिकारी युवा संगठन की प्रवक्ता मुदिता से बांग्लादेश जैसे आंदोलन की इच्छा को लेकर सवाल किए गए, जिस पर उन्होंने कथित तौर पर सहमति जताई.

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ओपी/एबीएम