
देहरादून, 2 मई . उत्तराखंड सरकार ने जमीन धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गठित जमीन धोखाधड़ी समिति ने 104 मामलों की समीक्षा की.
कमिश्नर पांडे ने कहा, “6 अप्रैल को हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिया था कि जमीन की धोखाधड़ी के मामलों में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाए. विस्तृत जांच के बाद 24 मामलों में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं.”
उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी के मामलों में बिना मालिकाना हक के जमीन बेचना, जाली दस्तावेज तैयार करना, असल से ज्यादा जमीन बेचना और खसरा नंबर में कब्जा दिखाकर धोखा देना शामिल है. कमिश्नर ने कहा, “44 मामलों का निपटारा कर दिया गया है. कुछ मामले अदालत में लंबित थे और कुछ में शिकायतकर्ता खुद संतुष्ट थे.”
सरकार ने एक नई पारदर्शी व्यवस्था भी शुरू की है. जिन लोगों के मामले निपट जाते हैं, उन्हें लिखित सूचना भेजी जा रही है. इसमें आवेदन प्राप्त होने की तारीख, समिति द्वारा की गई कार्रवाई और अंतिम परिणाम की पूरी जानकारी दी जाती है. कमिश्नर पांडे ने इसे पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.
मुख्यमंत्री के अतिरिक्त सचिव बंशीधर तिवारी ने पौड़ी जिले की समीक्षा बैठक के बाद बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार राज्य के हर ब्लॉक में छात्रावास बनाए जाएंगे. सबसे अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों को चयनित किया जाएगा. लड़कियों के लिए अलग छात्रावास बनाने का भी फैसला लिया गया है.
अवैध निर्माणों पर सख्ती बरतते हुए तिवारी ने कहा कि जहां भी अवैध निर्माण की सूचना मिल रही है, वहां लगातार ध्वस्तीकरण अभियान चलाए जा रहे हैं. एमडीडीए की वेबसाइट पर अवैध निर्माणों की सूची भी अपलोड की जा रही है, ताकि लोग जानकारी ले सकें.
उत्तराखंड सरकार जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी, अवैध कब्जे और अवैध निर्माणों पर लगातार नजर रखे हुए है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रशासन इन मामलों में तेजी से कार्रवाई कर रहा है. प्रशासन का कहना है कि इन प्रयासों से न केवल आम लोगों को न्याय मिलेगा बल्कि राज्य में निवेश का माहौल भी बेहतर बनेगा.
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एससीएच