
चेन्नई, 2 मई . तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना से कुछ दिन पहले विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) प्रमुख थोल. तिरुमावलवन ने गठबंधन वाली सीटों पर पार्टी कार्यकर्ताओं के समन्वय की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई है. 23 अप्रैल को हुए मतदान के बाद राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता के बीच उनका यह बयान अहम माना जा रहा है.
इस बार तमिलनाडु में मुकाबला चार मोर्चों के बीच रहा. द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) प्रमुख गठबंधनों का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि तमिलगा वेत्री कड़गम और नाम तमिलर काची जैसी पार्टियां स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरी थीं.
चुनाव में 85.15 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाताओं की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है. वोटों की गिनती 4 मई को होगी.
तिरुमावलवन ने एक बयान में कहा कि कई विधानसभा क्षेत्रों से शिकायतें मिली हैं कि जहां वीसीके उम्मीदवार मैदान में नहीं थे, वहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने गठबंधन उम्मीदवारों का प्रभावी समर्थन नहीं किया. उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ इलाकों में कैडर ने प्रचार अभियान के दौरान सहयोगी दलों के साथ अपेक्षित तालमेल नहीं रखा, जिससे जमीनी स्तर पर समन्वय प्रभावित हुआ.
उन्होंने कहा कि पार्टी ने ऐसे मामलों की विस्तृत रिपोर्ट जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
तिरुमावलवन ने कहा, “जहां कार्यकर्ताओं ने गठबंधन सहयोगियों के साथ तालमेल नहीं रखा, वहां की जानकारी जुटाई जा रही है. पूरी समीक्षा के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी.” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर सुधारात्मक कदमों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
इन मुद्दों के बावजूद उन्होंने भरोसा जताया कि डीएमके नीत गठबंधन आरामदायक जीत दर्ज करेगा.
उन्होंने व्यापक चुनावी समीकरणों का भी विश्लेषण किया. तिरुमावलवन ने कहा कि अभिनेता-राजनेता विजय ने उन वोटों को बांटने में भूमिका निभाई है, जो अन्यथा दो प्रमुख द्रविड़ दलों के खिलाफ जा सकते थे. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद विजय के पास अभी स्वतंत्र रूप से सत्ता हासिल करने लायक संगठित ताकत नहीं है.
उन्होंने आगे कहा कि यदि भाजपा के साथ गठबंधन में एआईएडीएमके सरकार भी बना लेती है, तो यह विजय के लिए चिंता का विषय नहीं होगा, क्योंकि अभिनेता ने भाजपा को अपना प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं बताया है.
उधर, चुनाव बाद आए एग्जिट पोल में अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं. ज्यादातर सर्वे डीएमके गठबंधन की वापसी का दावा कर रहे हैं, जबकि कुछ सर्वे एआईएडीएमके की वापसी की संभावना जता रहे हैं. एक सर्वे ने चौंकाने वाले नतीजों के संकेत भी दिए हैं, जिससे राज्य की राजनीति में बहस तेज हो गई है.
अब तमिलनाडु की नजर 4 मई की मतगणना पर है, जो राज्य की आगे की राजनीतिक दिशा तय करेगी.
–
डीएससी