
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर . उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने तमिलनाडु दौरे के दौरान महान स्वतंत्रता सेनानी पासुमपोंग मुथुरामलिंग थेवर को श्रद्धांजलि दी और गांधीग्राम रूरल इंस्टीट्यूट के स्वर्ण जयंती समारोह में हिस्सा लिया.
भारत के उपराष्ट्रपति के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा, “पासुमपोंग मुथुरामलिंग थेवर की जयंती और गुरु पूजा के अवसर पर आज उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रामनाथपुरम जिले के पासुमपोंग में स्थित थेवर थिरुमगन के स्मारक पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें श्रद्धांजलि दी.”
उपराष्ट्रपति ने कहा, “पासुमपोंग मुथुरामलिंग थेवर ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने अपने सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. उन्होंने अपने पूरे जीवन में ईमानदारी, सादगी और सम्मानपूर्ण जीवन का पालन किया.”
उन्होंने कहा, “जब उन्होंने यह घोषणा की कि वे मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर में वंचित वर्गों के प्रवेश के संघर्ष का नेतृत्व करेंगे, चाहे कोई भी इसे रोकने की कोशिश करे, तभी यह संघर्ष सफलतापूर्वक संपन्न हो सका. उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया. जब तक यह धरती रहेगी, तब तक उनकी ख्याति भी कायम रहेगी.”
एक अन्य पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने बताया, “डिंडीगुल स्थित गांधीग्राम रूरल इंस्टीट्यूट (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के 39वें दीक्षांत समारोह में, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आध्यात्मिक गुरु और तमिल विद्वान थवथिरु कुंद्रकुडी पोन्नम्बाला आदिगलार, इसरो के पूर्व वरिष्ठ एयरोस्पेस वैज्ञानिक एस. नाम्बी नारायणन और प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर एस. एस. एम. सुंदरम को मानद डॉक्टरेट (ऑनरिस कॉसा) से सम्मानित किया. यह सम्मान उन्हें आध्यात्मिकता, तमिल विद्वता, विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए दिया गया.”
इससे पहले गांधीग्राम रूरल इंस्टीट्यूट के स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने दो नई इमारतों का उद्घाटन किया और तीन नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जिनमें 30 कक्षाओं वाला एक शैक्षणिक परिसर भी शामिल है.
उन्होंने ‘इनक्लूसिविटी ऑफ इंडियाज एजिंग पॉपुलेशन’ नामक पुस्तक का विमोचन किया और स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में एक डाक टिकट और पोस्टल कवर जारी किया.
उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु के डिंडीगुल स्थित गांधीग्राम रूरल इंस्टीट्यूट के स्वर्ण जयंती समारोह और 39वें दीक्षांत समारोह में मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किए. इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की शुरुआत विकसित गांवों से होती है. उन्होंने पिछले 12 वर्षों में ग्रामीण बुनियादी ढांचे और मूलभूत सुविधाओं में हुई उल्लेखनीय प्रगति का जिक्र किया और ग्रामीण क्षेत्रों के हर नागरिक के लिए बेहतर अवसर और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने का आह्वान किया.
इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, कुलाधिपति डॉ. के. एम. अन्नामलाई, कुलपति डॉ. एन. पंचनाथन और अन्य व्यक्ति उपस्थित थे.
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एससीएच/वीसी