
पुलवामा, 30 जुलाई . ‘धरती का स्वर्ग’ कहे जाने वाले कश्मीर के पुलवामा घाटी के खूबसूरत बागानों में बहुप्रतीक्षित बादाम की हार्वेस्टिंग का काम पूरे जोरों पर शुरू हो चुका है. पिछले कुछ वर्षों से लगातार कम उत्पादन की मार झेल रहे किसानों के चेहरों पर इस साल राहत की साफ झलक देखी जा रही है.
पुलवामा के मुख्य बागवानी अधिकारी, रियाज अहमद शाह ने से कहा, “इस साल मौसम ने हमारा भरपूर साथ दिया है. किसानों की दिन-रात की मेहनत, सही समय पर दी गई विभागीय कृषि सलाह और उन्नत कीटनाशकों एवं उर्वरकों के सटीक इस्तेमाल से पैदावार में यह जबरदस्त उछाल आया है.”
लगातार गिरते उत्पादन की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन ने एक अनोखी पहल की है. रियाज अहमद शाह ने बताया कि जिला प्रशासन और निदेशालय के साझा प्रयासों से 100 कनाल जमीन पर एक विशेष बाग स्थापित किया गया है. इसके अलावा, नर्सरी की 5 हेक्टेयर भूमि पर विदेशों से उच्च गुणवत्ता वाले पौधे मंगाकर लगाए गए हैं. अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय में यह कदम कश्मीर के बादाम उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.
ऑटोमेशन और मशीनी युग में भी पुलवामा के किसान बादाम की हार्वेस्टिंग के लिए अपनी पुरानी और पारंपरिक जनजातीय विधियों से गहरे जुड़े हुए हैं.
किसान खुद पेड़ों पर चढ़कर लंबी और लचीली लकड़ियों से शाखाओं को बड़ी सावधानी से पीटते हैं, ताकि बादाम नीचे गिरें. पेड़ों के नीचे जमीन पर विशाल तिरपाल बिछा दी जाती है, जिससे गिरने वाले बादाम मिट्टी में खराब न हों और बिल्कुल सुरक्षित रहें.
बादामों से उनका हरा छिलका अलग किया जाता है. एक दौर था जब पूरा परिवार आंगन में बैठकर यह काम हाथों से करता था, हालांकि अब समय बचाने के लिए कई बागान मालिक आधुनिक मशीनों का सहारा लेने लगे हैं. अंत में छिलके वाले बादामों को खुली धूप में सूखने के लिए बिछा दिया जाता है, जिससे उनके अंदर की गिरी एकदम कुरकुरी और स्वादिष्ट हो जाती है.
कागजी बादाम अपनी कागज जैसी पतली परत के लिए इतना मशहूर है कि इसे आप बिना किसी मशीन के सिर्फ अपने हाथों से आसानी से फोड़ सकते हैं.
कश्मीरी मामरा अपने छोटे आकार, विशेष मुड़ी हुई बनावट, भरपूर प्राकृतिक तेल और स्वाद के कारण यह बादाम उच्च प्रीमियम श्रेणी में गिना जाता है.
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वीकेयू/एएस