मुंबई: वारिस पठान की टिप्पणी पर वसीम खान ने डीसीपी से की शिकायत, कार्रवाई की मांग

मुंबई, 29 सितंबर . भाजपा माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष वसीम खान ने विवादित स्थल और वक्फ संपत्ति को लेकर एआईएमआईएम नेता वारिस पठान की टिप्पणी एवं कथित कार्रवाई के खिलाफ पुलिस से शिकायत की है. उन्होंने डीसीपी जोन-3 से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी और वारिस पठान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की.

वसीम खान ने आरोप लगाया कि वारिस पठान खिलाफत हाउस पहुंचे और वहां के गेट पर ताला लगाया. उन्होंने सवाल किया कि वारिस पठान को वहां ताला लगाने का अधिकार किसने दिया था और क्या उन्हें किसी सरकारी विभाग या वक्फ बोर्ड की ओर से ऐसा करने के लिए अधिकृत किया गया था. यदि किसी संपत्ति को लेकर वक्फ बोर्ड और किसी अन्य पक्ष के बीच विवाद है तो उसके समाधान के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए. किसी व्यक्ति को स्वयं मौके पर जाकर ताला लगाने का अधिकार नहीं है. उन्होंने दावा किया कि मौके पर तनाव की स्थिति बनी और बड़ा विवाद होने से बचा. इसी को लेकर उन्होंने डीसीपी से मुलाकात कर मामले में कार्रवाई की मांग की.

उन्होंने बताया कि डीसीपी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि मामले की जांच के बाद कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने पुलिस से यह भी अनुरोध किया कि विवादित स्थल पर लगाया गया ताला खुलवाया जाए. खान ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने में विश्वास रखते हैं. लेकिन, अगर जनता के हित में आंदोलन की जरूरत पड़ी तो पार्टी कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे और ऐसा आंदोलन भी शांतिपूर्ण एवं मुद्दे पर आधारित होगा.

वसीम खान ने एआईएमआईएम नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ कानून को लेकर पहले कड़ी आपत्ति जताई थी और उसे लेकर बड़े आंदोलन की बात कही थी. जिस वक्फ कानून का एआईएमआईएम नेतृत्व विरोध करता रहा है, उसी वक्फ बोर्ड का सहारा लेकर वारिस पठान विवादित स्थल पर पहुंचे. उन्होंने इसे चिंताजनक और निराशाजनक बताते हुए कहा कि कानून से जुड़े विवादों का समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए.

खान ने कहा कि यदि दो पक्षों के बीच वक्फ संपत्ति को लेकर विवाद है तो संबंधित पक्ष पुलिस या अदालत के माध्यम से अपनी बात रख सकता है. उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. मौके पर तनाव इतना बढ़ गया था कि स्थिति हिंसक हो सकती थी. ऐसी परिस्थितियों में किसी नेता को मौके पर जाकर माहौल को और तनावपूर्ण नहीं बनाना चाहिए. मुसलमानों को विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ना चाहिए और धर्म को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाने का विरोध किया जाना चाहिए.

वसीम खान ने वारिस पठान के कथित बयानों और भाषा पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि किसी विवाद में कानून का उल्लंघन होता है तो कार्रवाई कानून के तहत होनी चाहिए, न कि किसी व्यक्ति या संगठन की ओर से अपने स्तर पर. किसी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता से समाज में शांति बनाए रखने की अपेक्षा होती है. वारिस पठान की कथित भाषा सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकती.

वसीम खान ने आगे कहा कि उन्होंने अपने वरिष्ठ नेताओं और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. मनोज शर्मा से भी मामले को लेकर बातचीत की है. पुलिस की ओर से मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है और किसी भी विवाद का समाधान कानून के दायरे में होना चाहिए. खान ने कहा कि कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और किसी को भी अपनी राजनीतिक या सामाजिक पहचान के आधार पर कानून से ऊपर नहीं समझना चाहिए.

–

पीएसके