‘हम लड़ते रहेंगे’, एनएचआरसी सदस्य ने मदरसों की अनियमितताओं पर फिर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 29 अप्रैल . राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर कर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा फंडेड मदरसों की नियमितताओं पर गंभीर आरोप लगाया है. प्रिंयक कानूनगो ने वीडियो के माध्यम से मदरसा शिक्षक द्वारा लगाई जा रही फर्जी हाजरी का दावा किया है.

दरअसल, कानूनगो का यह बयान इलाहाबाद हाई कोर्ट की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पर की गई उस तल्ख टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें एनएचआरसी ने राज्य के 588 मदरसों की जांच ईओडब्ल्यू से कराने की बात की है. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि मानवाधिकार आयोग अपना काम न करके मदरसों की जांच कराने का आदेश दे रहा है, जो गैरकानूनी और गैर गैरसंवैधानिक दोनों हैं. हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि जब मुसलमानों पर भीड़ द्वारा मॉब लिंचिंग की जाती है तो मानवाधिकार आयोग मौन हो जाता है. अपने काम के स्थान पर आयोग मदरसों की जांच का आदेश दे रहा है, जो कि नियमों के भी विरुद्ध है.

वहीं, प्रियंक कानूनगो ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि हमको शिकायत करने वाले ने बताया है कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के राज्य सरकार द्वारा फंडेड मदरसे का है, जहां टैक्सपेयर के खून-पसीने से भरे गए टैक्स को मदरसा मास्टर की तनख्वाह के रूप में उड़ाने के लिए फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है. यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार का खुला उल्लंघन है. हम तथ्यों के सच-झूठ होने की जांच करवाएंगे तो हमें अपमानित करने के प्रयास किए जाएंगे, पर हम लड़ते रहेंगे क्योंकि यह देश हमारा है.

दरअसल, प्रियंक कानूनगो ने दावा किया है कि यह वीडियो एक मदरसे का है, जहां कुछ मदरसा मास्टर बायोमैट्रिक मशीन पर कार्डों के माध्यम से फर्जी हाजरी लगा रहे हैं. कानूनगो ने इस मामले में जांच कराने की मांग की है.

जस्टिस अतुल श्रीधरन की बेंच टीचर्स एसोसिएशन मदारिस यूपी के महासचिव हाजी दीवा जमा खान की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर राज्य सरकार द्वारा यूपी के 588 एडेड मदरसों की ईओडब्ल्यू से जांच कराए जाने के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है. हाई कोर्ट ने पूर्व में ही मामले में ईओडब्ल्यू की जांच पर रोक लगाई है. वहीं, अब हाईकोर्ट ने मामले में मानवाधिकार आयोग को लेकर तल्ख टिप्पणी की है. अगली सुनवाई 11 मई को होनी है.

एमएस/डीकेपी