
नोएडा, 29 अप्रैल . पश्चिम बंगाल में मनोज कुमार सिंह ने बड़े राजनीतिक बदलाव होने के संकेत दिए हैं. मैटराइज न्यूज कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर मनोज कुमार सिंह ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि इस बार बंगाल में व्यापक परिवर्तन का माहौल दिखाई दे रहा है.
मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पिछले 50 वर्षों से राज्य में ‘डबल-इंजन सरकार’ नहीं रही है, यानी केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार का अभाव रहा है. उनका मानना है कि जनता अब इस स्थिति को बदलना चाहती है, क्योंकि लोगों को विश्वास है कि केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने से विकास को गति मिलती है.
उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता लंबे समय से भय, भूख और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से जूझ रही है और अब इससे मुक्ति चाहती है. उन्होंने दावा किया कि युवाओं ने इस बार बदलाव के लिए सक्रिय अभियान चलाया है और वे मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व से छुटकारा पाने की बात कर रहे हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि जमीनी स्तर पर मतदाता खुलकर अपनी राय व्यक्त करने से बचते हैं. सर्वे के दौरान उनकी टीम को कई बार यह स्पष्ट करना पड़ता था कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, तब जाकर लोग बातचीत के लिए तैयार होते थे.
अन्य राज्यों की स्थिति पर बात करते हुए मनोज कुमार सिंह ने कहा कि केरल में मौजूदा मुख्यमंत्री की उम्र और कुछ विवादित मुद्दों को लेकर हिंदू समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है. उन्होंने बताया कि पारंपरिक रूप से कम्युनिस्ट दलों का कोर वोटर आधार हिंदू रहा है, जिसमें क्रिश्चियन और मुस्लिम समुदाय के समर्थन से सत्ता हासिल होती रही है, लेकिन इस बार समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं.
उनके अनुसार, क्रिश्चियन समुदाय कांग्रेस की ओर झुक रहा है, जबकि मुस्लिम वोटर भी उसके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, जिससे वहां सत्ता परिवर्तन की संभावना बन रही है. वहीं, असम में कांटे की टक्कर हो सकती है, जबकि तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के दोबारा सत्ता में लौटने की संभावना जताई गई.
पश्चिम बंगाल में मतदान प्रतिशत को लेकर सिंह ने ‘एसआईआर’ प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि इसके प्रभाव को समझना जरूरी है. उनके अनुसार, यदि 100 मतदाताओं में से लगभग 14 प्रतिशत नाम हटा दिए जाते हैं तो शेष 86 मतदाताओं में मतदान प्रतिशत स्वाभाविक रूप से अधिक दिखाई देगा, भले ही वास्तविक मतदान संख्या में बड़ा बदलाव न हुआ हो.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी माहौल में ‘बांग्लादेशी’ मुद्दे को उठाकर डर का वातावरण बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग अस्थायी रूप से बंगाल में आकर पहचान पत्र बनवाते हैं और काम के लिए अन्य स्थानों पर चले जाते हैं, लेकिन चुनाव के समय वोट डालने वापस लौटते हैं. उन्होंने कहा कि यह भय फैलाया जा रहा था कि अगर ये लोग मतदान के लिए बाहर निकलेंगे तो उनकी नागरिकता छीन ली जाएगी, जिसके चलते वे बड़ी संख्या में मतदान के लिए लौटे.
मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इस बार राजनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है. पहले जहां जमीनी स्तर के मजबूत नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस को मजबूती दी थी, वहीं अब यह धारणा बन रही है कि राज्य का झुकाव भारतीय जनता पार्टी की ओर हो सकता है. उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद ‘डबल-इंजन’ सरकार की संभावना ने खासकर युवाओं में नई उम्मीद जगाई है, जो राज्य में बदलाव और विकास की अपेक्षा कर रहे हैं.
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एएसएच/डीकेपी