
मालदा, 8 सितंबर . पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ और गंगा नदी के कटाव ने हालात बेहद मुश्किल कर दिए हैं. मानिकचक और रतुआ इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं. रतुआ की चार ग्राम पंचायतों में करीब 80 हजार लोगों के बाढ़ की चपेट में आने की बात सामने आई है. कई जगह सड़कें पानी में डूबी हुई हैं, जबकि स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और एक ग्राम पंचायत कार्यालय में भी बाढ़ का पानी घुस गया है. भूतनी इलाके में बांध टूटने के बाद 100 से ज्यादा गांव प्रभावित हुए हैं और लगातार हो रहे नदी कटाव ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है.
भुटनी दियारा में रहने वाले लोगों के लिए यह संकट सिर्फ पानी भरने तक सीमित नहीं है. यहां कई परिवारों के घर और खेत नदी के कटाव की भेंट चढ़ चुके हैं. एक महिला ने से अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनका घर कट गया है और अब उनके पास न रहने की जगह है और न ही खाने का इंतजाम. उन्होंने कहा कि घर का सामान भी पानी में बह रहा है और सुबह से उन्होंने कुछ नहीं खाया. महिला ने बताया कि उनके चार बच्चे हैं और उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद नहीं मिलने की शिकायत की.
महिला ने कहा कि उन्हें अब घर बनाने के लिए जमीन, रहने की जगह और खाने-पीने की जरूरत है. उनका कहना है कि संकट की इस घड़ी में नेता या प्रधान उनकी मदद के लिए नहीं पहुंचे हैं. बाढ़ के कारण रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है.
वहीं, एक बुजुर्ग स्थानीय निवासी ने बताया कि भुटनी दियारा के कई टोले और गांव नदी कटाव से प्रभावित हुए हैं. बड़ी संख्या में लोगों के घरों में पानी घुस गया है. उन्होंने करीब ढाई लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा किया. हर साल कटाव के बाद मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इतने वर्षों में भी दियारा क्षेत्र की स्थायी समस्या का समाधान नहीं हो पाया.
उन्होंने 1972 से 2026 तक कई सरकारों और मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि किसी ने भी दियारा क्षेत्र की समस्या को स्थायी रूप से हल करने के बारे में नहीं सोचा. हालांकि, वर्तमान सरकार ने लोगों को मदद का भरोसा दिया है.
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पीआईएम/पीएम