
मुंबई, 2 मई . महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, यानी ‘नारी शक्ति’, अत्यंत आवश्यक है.
महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश अपनी पूर्ण आर्थिक क्षमता तक तभी पहुंच पाएगा जब महिलाएं राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देंगी.
महिलाओं के योगदान को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया और कहा कि महाराष्ट्र को पहली एक करोड़ (10 मिलियन) ‘लखपति दीदियां’ बनाकर देश का नेतृत्व करना होगा.
इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनके जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण परिणाम दिखने लगे हैं. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र वर्तमान में 50 लाख ‘लखपति दीदियों’ (1 लाख रुपए या उससे अधिक वार्षिक आय वाली महिलाएं) का सृजन करने की दिशा में अग्रसर है.
उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से सरकार के 300 करोड़ रुपए के वृक्षारोपण अभियान का नेतृत्व करने का आह्वान किया. ‘उमेद’ महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत, एसएचजी को नर्सरी स्थापित करने के लिए निधि उपलब्ध कराने हेतु एक विशेष योजना तैयार की जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि सरकार पौध तैयार करने, रोपण और रखरखाव का खर्च वहन करेगी, जिससे इन समूहों को स्थायी व्यावसायिक आय प्राप्त होगी.
मुख्यमंत्री फडणवीस ने महालक्ष्मी सरस प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि इसका आयोजन और गुणवत्ता अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों के बराबर है. मुख्यमंत्री ने नागरिकों से उमेद मार्ट के माध्यम से खरीदारी करके स्थानीय उद्यमियों का समर्थन करने का आग्रह किया. उमेद मार्ट एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिस पर अब महिला स्वयं सहायता समूहों के 1,000 से अधिक नए उत्पाद उपलब्ध हैं.
उन्होंने कहा कि स्थायी बाजार पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उमेद मॉल वर्तमान में 20 जिलों में निर्माणाधीन हैं. शेष 16 जिलों में भी जल्द ही काम शुरू होने वाला है. सरकार की योजना आने वाले वर्षों में इस मॉल नेटवर्क को तहसील (तालुका) स्तर तक विस्तारित करने की है.
ग्रामीण विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने कहा कि यह प्रदर्शनी भारत में अपनी तरह की सबसे बड़ी प्रदर्शनी है. उन्होंने ‘उमेद’ मिशन से संबंधित प्रमुख आंकड़े साझा किए.
उन्होंने आगे कहा कि इस पहल के तहत महाराष्ट्र के 39,558 गांवों तक पहुंचा जा चुका है. इससे 6.68 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 64 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है. वर्तमान में राज्य में 331 महिला किसान उत्पादक कंपनियां कार्यरत हैं.
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एमएस/